नवरात्रि का संकल्प सिर्फ नौ दिन ही क्यों ??

नोट: मेरे इस लेख को धर्म से जोड़ कर न देखें,मैं अपने धर्म का बहुत सम्मान करती हूँ और ये लेख सिर्फ इंसानों के लिए है इसलिए इसके बीच में धर्म को लाने की आवश्यकता नहीं है । आप सभी को नवरात्रि की बधाई हो ,मेरा सवाल बस इतना ही है कि नवरात्रि का संकल्प […]

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मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी

मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी ? आजकल हमारे आस पास जो भी घटनाएं देखने को मिल रही हैं वो बस यही सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी है और रह रह कर यही सवाल दिमाग में कौंधता रहता है। आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य उतना जरूरी हो गया है जितना कि […]

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अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (international girl child day )

आज अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है और मेरे व्हाट्सप्प लिस्ट में सिर्फ एक लड़की को ये याद था शायद,और सबसे ज़्यादा शर्म की बात ये है कि मुझे भी याद नहीं था और उसका स्टेटस देखने के बाद मुझे एहसास हुआ की यही वो मुद्दा है जिसपर मैं हमेशा से कितना कुछ लिखना चाहती थी,पहले एक […]

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कोडिंग और बचपन

आजकल टीवी पर और सोशल मीडिया पर एक ही बात छायी हुई है , बच्चे कोडिंग सीख रहे हैं और एंड्राइड एप्लीकेशन बना रहे है। मैंने एक विज्ञापन देखा जिसमेंएक छोटा बच्चा  कोडिंग सीख कर एंड्राइड एप्लीकेशन बना रहा है और दुनिया भर के इन्वेस्टर उसे खरीदने के लिए आपस में लड़ रहे हैं और […]

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बेड़ू रोट और मेरे बुबु के किस्से

बचपन में घी संक्रांति खुशियों भरा त्यौहार होता था ,खुशियाँ आज भी लाता है ये त्यौहार पर बचपन की बात ही कुछ और थी, हमें एक दिन पहले से ही ख़ुशी हो जाती थी कि घी का त्यौहार आएगा और हम बेड़ू रोट खाएंगे । तब हमें ये भी नहीं पता था कि जिस दाल […]

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भाई-बहन, एक प्यारा सा रिश्ता।

एक खूबसूरत सी डोर है, जिसमे बिखरे हैं हज़ारों रंग प्यार के, कुछ धागे हैं विश्वास को जो बांधते हैं, ये जो चमकता सा हैं न राखी में,ये भाई बहन की खट्टी मीठी तकरार है, कुछ बचपन के पल है,पल है, जिनमें है थोड़ी सी हंसी की खिलखिलाहट है, कुछ लड़ाई झगड़ो की बाते हैं, […]

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वो दोस्त जो हमसफ़र बन जाते हैं

बचपन में वो यारों का मजमा, वो स्कूल के रास्ते ,कुछ स्कूल के दोस्त, और मोहल्ले में अपना ही एक गुट होता था, हाँ वो यारों का ज़माना ही तो होता था। उम्र के साथ दोस्त भी बदलते गए , कुछ किस्सों में बाकि रह गए और कुछ हमेशा के साथी बन गए , वो […]

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वो खूबसूरत सा गुलाबी पेड़ और उसकी यादें -बोगनवेलिया

जून में जब अल्मोड़ा गयी तभी वहां मुझे अपने शहर पहुँचने का एहसास कराता वो गुलाबी फूलों से भरा पेड़ माल रोड में दिख गया और मन अपनेपन के एहसास से और वापिस अपने शहर में कदम रखने की ख़ुशी से भर उठा | जब हम अपने शहर और अपने घर में होते हैं तब […]

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