अल्मोड़ा के दिलबहार छोले

अगर आप अल्मोड़ा निवासी हैं या फिर यहाँ रहे हैं ,तो आपने दिलबहार छोले ज़रूर खाये होंगे ।
दिलबहार छोले की छोटी सी दुकान लिए अंकल आपको मिल जायेंगे महिला अस्पताल के गेट के बाहर ,जाने कितने सालों से ये चलती फिरती दुकान यहीं पर खड़ी है ,जिससे जुड़ी है हज़ारों यादें ,जाने कितने किस्से कहानियां ,हमारा बचपन ।
बचपन में जब भी बाजार जाते हुए या स्कूल से कॉलेज जाते हुए जाने कितनी ही बार दिलबहार छोलों का स्वाद लिया है और तब भी मन नहीं भरा और सच कहूं तो अभी लिखते हुए भी मुँह में पानी आ रहा है ।
यहाँ के छोले बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं और इस अंदाज़ में बनाये गए छोले आपको कहीं और नहीं मिलेंगे ,ऐसा मैं इसलिए कह सकती हूँ क्योंकि अल्मोड़ा से दूर जाने के बाद मैंने हर जगह ऐसे छोले ढूंढें पर मुझे ये छोले कहीं और नहीं मिले ,अगर आपको मिले हो तो बताइये ।
ये छोले अंकल कुछ खास तरह से बनाते हैं ,जिसमे सफ़ेद मटर ,मिर्च ,नीम्बू और हरी मिर्च ,प्याज़ इस अनुपात में मिलते हैं की जायका ही कुछ और हो जाता है और उसी में शायद अंकल की सीक्रेट रेसिपी भी शामिल हो क्योंकि मैंने खुद भी घर में बनाने की कोशिश की पर वो स्वाद नहीं आया जो दिलबहार छोलों में आता है ।
दिलबहार छोले का स्वाद ऐसा है जैसे थोड़ा तीखा, थोड़ा खट्टा ,कुछ चटपटा सीधा दिल को छूने वाला जैसे कि हमारा अल्मोड़ा और अल्मोड़ा कि यादों में दिलबहार छोले भी बसते है ,ये छोले बहुत याद आते है जब हम अपने शहर अपने अल्मोड़ा से दूर हो जाते हैं ,जब आप अल्मोड़ा जाते हो और छोले बिना खाये ही लौट आते हो और फिर आपको याद आता है ,अरे छोले खाना तो भूल ही गए ,जब आप अपने शहर की एक एक गली को इतने प्यार से नापते हो जैसे किसी अपने से गले मिल रहे हो ,जब आप कई सालों बाद अपनी बाज़ार में घूमते हो और हर एक जगह में खुद को ढूंढते हो और नयी बन चुकी दुकानों और इमारतों को पहचानने कि कोशिश करते हो और आपको कोई नहीं पहचानता ,तब बहुत याद आता है अपना पुराना शहर अल्मोड़ा ।
तो अगर आप अल्मोड़ा घूमने का प्लान बना रहे हैं या कभी भी अल्मोड़ा जायें तो एक बार दिलबहार छोले का स्वाद ज़रूर ले और अल्मोड़ा की चटपटी यादें अपने साथ ले जायें ।
अगर आपकी भी कुछ यादें हैं तो हमारे साथ ज़रूर शेयर कीजिये
धन्यवाद् ।

चित्र साभार :अल्मोड़ा ऑनलाइन

4 thoughts on “अल्मोड़ा के दिलबहार छोले

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