एक दुनियां बँटी हुई

रंग ही तो है ,
फिर क्यों नीला लड़के का और गुलाबी लड़की का ,
जन्म लेते ही बाँट देते हो इनको रंगो में ,
अलग तो कुदरत ने पहले ही कर दिया है ,
पर तुम इस दूरी को और क्यों बढ़ाते हो ?
अब तो किंडर जॉय भी नीला लड़को का ,
गुलाबी लड़कियों का ,
क्यों लड़कियों को नीला नहीं पसंद आ सकता और लड़के गुलाबी नहीं पहन सकते ?
हो सकता है उसे भी गुलाबी पसंद हो ,पर सिर्फ इस डर से कि लोग कहेंगे ,”अरे यार लड़कियों वाला रंग पहन लिया” ,और उसने गुलाबी रंग ही छोड़ दिया ||
गुड़ियों से सिर्फ लड़की ही खेलेगी और गाड़ियों और एयरोप्लेन से लड़के ,
वो भी उस युग में जहाँ लड़कियां प्लेन उड़ाती हैं ,
हैरत तो तब होती है जब किंडर जॉय के खिलौने में भी ,
लड़कियों के लिए प्रिंसेस और लड़कों के लिए रोबोट आते हैं ,
हो सकता है किसी लड़के को मशीन नहीं फैशन भाता हो ,पर वो नहीं चुनता ये रास्ता क्योंकि सबके दिमाग में पहले से ही फिट है ,कि वहां तो “वैसे ” लड़के जाते है ,
अब इस वैसे की परिभाषा मुझे भी समझाइये ,
क्यों दुनियां को भी बाँट दिया है ,घर लड़कियों का ,ऑफिस लड़कों का ,
लड़कियां भी बाहर निकल रही हैं ,पर फिर भी “कुछ भी कर लो ,चूल्हा चौका तो करना ही पड़ेगा ” ऐसी सोच कहीं न कहीं टकरा ही जाती है ,
और ये सच भी है ये बहुत हद तक ,पर दोनों के लिए ,चूल्हा चौका दोनों को ही करना है ,
क्योंकि भूख तो दोनों को ही लगती है ,इंसान तो दोनों ही है ,
हाँ दोनों को ही सिखाइये एक जैसे सबक ,
और अगर लड़का घर संभाल ले तो इसमें कोई शर्म की बात तो नहीं ,
अगर वो खाना बना दे या बीवी का हाथ बंटा दे तब वो जोरू का ग़ुलाम कहलाता है ,
पर अगर वो रौब दिखाए तो ही मर्द कहलाता है ,
वो भी झुकना चाहता है ,वो भी प्यार जताना चाहता है ,पर दुनिया में मर्द बनने के लिए खुद को भूलता जाता है ,
मत बाँटिये रंगो को ,खिलौनों को ,घर को ,सब एक सा ही तो है ,
क्यों कभी वो रोता नहीं है ,मर्द को दर्द क्यों कभी होता नहीं है ,
“अरे लड़की है क्या जो रोता है ,अरे लड़की जैसा नाज़ुक है “,इस डर से वो दर्द भी सहता है और आंसू भी छुपाता है ,
जब बरसों बाद बहन को देख के कभी आंसू आ जाये ,वो उनको खुद से भी छुपा लेता है ,हाँ वो रोता है ,जब बहन विदा होती है ,पर अकेले में ,हाँ उसने आंसू बहाये थे जब माँ से वो दूर हुआ था ,पर किसी ने देखा ही नहीं क्योंकि उसने छुपा लिया था उन्हें ,एक अँधेरे कमरे में ,
हाँ वो रोता हैअपने बच्चों की हर परेशानी में ,पर अधिकार नहीं हैं उसे ये आंसू दिखाने का ,घुटता जाता है वो ,कभी डिप्प्रेशन में तो कभी गुस्से में बिखर जाता है ,पर रो नहीं सकता ,
हाँ वो रोया था तब भी जब वो उसे छोड़ के गयी थी ,पर वो दिखाता है बस अपना गुस्सा या फिर बिखेर देता है उसकी ज़िन्दगी तेज़ाब की एक बोतल से ,क्योंकि वो रो नहीं सकता ,
बस यहीं पर तुमने बाँट दिया ,दर्द और आंसू लड़की के हिस्से और हिम्मत लड़कों के हिस्से ,
पर दोनों ही तो इंसान है ,दिल दोनों के पास है ,सामने नहीं रोयेगा तो छुप के रोयेगा ,पर कहीं तो वो अपने दर्द को भिगोयेगा ,
मन को जैसा भाये वैसा रहने दो ,एहसास ही तो है इन्हे बहने दो ,
कुदरत ने अलग किया है ,पर इन्हें एक जैसा ही रहने दो ||

10 thoughts on “एक दुनियां बँटी हुई

  1. दुख तो दूसरे रंगों को है उनको तो अनदेखा किया जाता है।

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