ऑक्सफ़ोर्ड एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन ChAdOx1 Covid-19 ,फेस 3 परीक्षण शेष

एक ओर जहाँ कोरोना महामारी ने दुनियाँ भर में 6 लाख लोगो की जान ले ली है और जाने कितने ही लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और बाकि एक डर के साये में जी रहे हैं ,वही दूसरी ओर दुनियाँ भर के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हुए है ,ऐसे में एक राहत भरी खबर आयी है ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से जहाँ पर वैज्ञानिकों ने एक ब्रिटिश फर्म एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन तैयार की है ओर इसके फेज I ओर फेज II के परीक्षण सफल ओर सकारात्मक आये हैं ओर अब फेज III के परीक्षण के नतीजों पर पूरे विश्व की नज़र है ।
आइये जानते हैं इस वैक्सीन के बारे में –

इस वैक्सीन का मुख्या काम हमारे शरीर में एंटीबाडी का निर्माण करना है जो कोरोना वाइरस से लड़ने में सक्षम हो ।
कोरोना वाइरस की सतह पर स्पाइक या नुकीले कांटे जैसे होते हैं जिन्हे स्पाइक प्रोटीन कहते हैं ओर ये वायरस इन्ही स्पाइक प्रोटीन्स के ज़रिये हमारी कोशिकाओं को भेद कर हमारे शरीर में हमला करता है और बहुगुणित (मल्टिपल) संख्या में बढ़ता जाता है ,इसे रोकने के लिए ये वैक्सीन कोरोना के स्पाइक प्रोटीन से लड़ने के लिए हमारे शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण करती है जिससे कि जब कोरोना वाइरस हमारे शरीर में प्रवेश करे तो एंटीबॉडीज स्पाइक प्रोटीन को वही पर नष्ट कर दे और कोरोना वाइरस हमारी कोशिकाओं को भेद न पाए ।

वैक्सीन का निर्माण –

इस वैक्सीन को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक फ्लू वाइरस का इस्तेमाल किया है जो कि चिम्पांजी के शरीर में फ़्लु के लिए ज़िम्मेदार है ,और इस वायरस का नाम एडिनो वायरस है ,इस वैक्सीन में इसका बहुत हल्का रूप प्रयोग में लाया गया है और इसे संशोधित किया गया है जिससे कि यह मानव शरीर में बहुगुणित मात्रा में न बढ़ पाए ।
जैसे ही ये वैक्सीन मानव शरीर में जाती है ,एडिनो वायरस एक कोड डालता है जिससे स्पाइक प्रोटीन बनने लगते है और हमारा शरीर इससे लड़ने के लिए एंटीबाडी तैयार करता है और प्रोटीन स्पाइक को वही पर नष्ट कर देता है ,जिससे कि भविष्य में कोरोना वायरस हमारे शरीर पर हमला करे तो इस वैक्सीन द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडीज उसे वही पर नष्ट कर दे ।

वैक्सीन के परीक्षण के परिणाम –

इस वैक्सीन के दोनों फेज के नतीजे बहुत सकारात्मक है ,और न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि ये हमारे शरीर में एंटीबॉडीज बनाने के साथ साथ ही टी-सेल्स बनने कि प्रक्रिया को भी तेज़ करते हैं जिससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ।

टी-सेल्स क्या है ??

ये एक तरह की सफ़ेद रक्त कोशिका है जो हमारे शरीर की पैथोजन ,कैंसर कोशिका या दूषित कोशिकाओं से रक्षा करती है ,यहाँ पर पैथोजन ,बैक्टीरिया ,वायरस या कोई सूक्ष्म जीव होते हैं जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं

अब फेज III परीक्षण के परिणामों का इंतज़ार सारी दुनियाँ को है जिससे कि हमे कोरोना और कोरोना के डर से मुक्ति मिले ,फेज III परीक्षण में मुख्या रूप से यह देखा जायेगा कि इस वैक्सीन से हमारे शरीर में जो ऐंटीबॉडी बनती है वो कब तक सक्रिय रहती है ।

इस वैक्सीन के प्रयोग के प्रभाव –

हल्का बुखार ,मांसपेशियों में दर्द ,ठण्ड लगना,सर दर्द आदि शामिल हैं जोकि पेरासिटामोल लेने के बाद ठीक हो जाते हैं ।
इसके फेज III परीक्षण ब्राज़ील में 5000 लोगों पर शुरू हो चुके हैं तो अब बेहतर परिणाम कि प्रार्थना कीजिये ।

भारत में इसकी स्थिति –

भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने ऑक्सफ़ोर्ड तथा एस्ट्राजेनेका के साथ करार किया है कि जैसे ही इस वैक्सीन के निर्माण का लाइसेंस मिल जायेगा ,ये भारत में इसकी करोड़ों खुराक बनाने की तैयारी में हैं पर इससे पहले सीरम को भारत में भी इस वैक्सीन का फेज III परीक्षण करना होगा ,इसके सफल परीक्षण के बाद ही उन्हें इस वैक्सीन के निर्माण का लाइसेंस मिल पायेगा ।
अगर आपके पास अधिक जानकारी हो तो कमेंट सेक्शन में शेयर ज़रूर करें ।
स्त्रोत-द इंडियन एक्सप्रेस

https://indianexpress.com/article/explained/oxford-astrazeneca-shot-shows-progress-what-does-this-mean-in-fight-to-find-covid-19-vaccine-6515316/

विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस वैक्सीन के बारे में विचार जानने के लिए वीडियो देखे

https://youtu.be/SDrhQMfQJ6k

पढ़ने के लिए धन्यवाद ।।

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