ऑनलाइन स्कूलिंग और टीचर्स

आज अपने मित्र को फ़ोन मिलाया ,
पर उठाते ही एक जवाब आया ,ऑनलाइन क्लास चल रही है ,
लॉक डाउन ने पढाई का नया तरीका सिखलाया है ,
ऑनलाइन स्कूलिंग का ज़माना आया है ,
नहा धोके बच्चे डट के ,फ़ोन पकड़ कर ,
जो पढ़ रहे हैं ,उन्हें क्या थी खबर ,
कि जिस फ़ोन में वो कार्टून और गेम्स खेलते थे ,
वो उन्हें इस तरह फ़सायेगा ,लॉक डाउन की छुट्टियों में भी स्कूल का दर्द ले आएगा ,
पर जहाँ फ़ोन एक बच्चे दो, वहाँ बड़ी परेशानी है ,
फ़ोन कहाँ से लाये ,ये एक नयी कहानी है ,
इसका भी फ़ोन वालो ने खूब फायदा उठाया है ,थोड़ा ही सही पर फ़ोन का दाम भी बढ़ाया है ,
बच्चे पढ़ रहे हैं और टीचर पढ़ा रहे हैं ,
सरकार की घोषणा के बीच कि “स्कूल की फीस नहीं ली जाएगी ” ,
एक सवाल मन में कौंधा जब फीस ही नहीं आएगी तो टीचरों कि तनख्वाह कहाँ से आएगी ,
पर बच्चे और टीचर दोनों ने ही ऑनलाइन में सामंजस्य बिठाया है ,
और जहाँ तनख्वाह मिल रही है वहाँ तक ठीक है ,

पर जहाँ नहीं मिल रही ज़रा उनके हाल भी जान लीजिये ,
वो टीचर है सम्मानित है ,पर अपनी हालत वो किससे कहे ,
कार्यक्षेत्र इनका बहुत व्यापक है ,पर तनख्वाह बिलकुल एक छोटे से कोने में सिमटी हुई सी बैठी है ,
टैलेंटेड ये बहुत है पर इनके बहुआयामी टैलेंट का मोल बहुत कम है ,
घोषणा तो हो ही जाती है कि कोई अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं काटेगा,
पर मानने वाला कोई नहीं ,बस एक घोषणा कि ज़रूरत है ,
जो काम करे बस उसे ही वेतन मिले ,चाहे सरकारी या वो प्राइवेट हो ,
काम करने पर मेहनताना जायज़ है ,पर कुम्भकरण से मुकाबला करने का मेहनताना कहाँ तक जायज़ है ,
कुछ सरकारी दामाद ऐसे भी हैं ,जिन्हे सरकार सिर्फ आराम करने कि तनख्वाह देती है ,
ज़रूरत है यहाँ पर सख्त कदम उठाने की,
“एक राष्ट्र ,एक नियम ,और काम करने पर वेतन” ,
इसे लागू करने की ,
प्राइवेट टीचर्स और स्कूलों के लिए नए नियामक लाने की ,
बच्चों की बढ़ती फीस पर किसी का काबू नहीं ,
टीचरों का जहाँ बोलबाला है ,सब बस दिखावा है ,
टीचर्स की ऑनपेपर और असली तनख्वाह का मेल कराने की ,
क्योंकि इसमें छिपा अंतर तो बस राज़ की बात है ,खुल जाये तो
कुछ अठन्नियां चवन्नियां ही हाथ आनी है ,
घोषणाओं की कमी नहीं है ,बस करंट अफेयर्स के काम में ही आती हैं ,
असल ज़िन्दगी में इनका कहीं नामों निशान नहीं ,
लॉक डाउन में गर सब है ,प्राइवेट कर्मचारी की ही तनख्वाह क्यों कट रही है ,
अजी बाकियों को भी तो देखिये ,आराम करने की तनख्वाह उन्हें मिल रही हैं ,
इन सभी आरामपसंदों की सूची बनवायी जाये और इनकी तनख्वाह से बाकियों की ज़रूरतें पूरी की जाये ,
सब के लिए एक जैसा नियामक लागू हो ,
“एक राष्ट्र ,एक नियम ,और काम करने पर वेतन”
सहमत हैं तो इसे फैलाइये ||

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