यमुनोत्री गर्ल्स हॉस्टल @KEC द्वाराहाट

चलिए आपको ले चलती हूँ ,यमुनोत्री गर्ल्स होटल ,कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट ,गंगोत्री गर्ल्स हॉस्टल अगर आपने नहीं पढ़ा तो आप इसे यहाँ  http://plotforthoughts.in/

पढ़ सकते हैं ,गंगोत्री गर्ल्स हॉस्टल में जो सबसे यादगार पल है वो है हमारे बर्थडे ,जो रात के 12 बजे सेलिब्रेट होते थे और सब बी ० टेक ० और एम ० सी ० ए ० की लड़कियां साथ मानती थी ,बर्थडे गर्ल को दूसरे रूम में भेजकर रूम को सजाया जाता था ,सब अपनी अपनी विशेज़ लिखते थे और 12 बजते ही शुरू हो जाता था बर्थडे और बर्थडे बम्स ,और बर्थडे गर्ल को हवा में उछालने का सिलसिला और पार्टी।

सेकंड ईयर में आते ही हम पहुँच गए यमुनोत्री ,जहाँ बी ० टेक ० फाइनल ईयर और एम ० सी ० ए ० सेकंड ईयर और फाइनल ईयर को रूम्स अलॉट होते थे और वहाँ हमारी वार्डन थी वही डैमी मैडम जिनका असली नाम मुझे आज भी नहीं पता ,लड़कियों से पूछा तो उन्होंने दमदमी माई बताया 😂😂😂 और जब भी वो आती थी सन्नाटा छा जाता था और जाने के बाद हंसी के फुव्वारे 😂😂

गंगोत्री से यमुनोत्री जाने में हम बहुत कुछ पीछे छोड़ आये ,फर्स्ट ईयर की यादें ,वो प्यारी सी त्रिमूर्ति और कुछ जाते हुए लोग जो हमेशा के लिए मन में बस गए ,हमारी बहुत प्यारी सुपर सीनियर्स ,पहले यमुनोत्री में मेस नहीं हुआ करती थी तो इसलिए हमें गंगोत्री जाने का सौभाग्य मिलता रहा और फिर आये हमारे जूनियर्स ,और अब हम बन चुके थे सीनियर्स ,क्या फीलिंग थी सीनियर बनने की मैं बता नहीं सकती ,और फिर शुरू हुआ रैगिंग लेने का सिलसिला ,वही सब फिर से जो हमने किया था वही हमने भी करवाया ,अरे भई परंपरा थी ,ऐसे कैसे छोड़ देते ऊपर से सीनियर बनने का जोश वो अलग ,फिर वापिस हम अपने यमुनोत्री ,जहाँ सबको सिंगल रूम मिलता था और बालकनी भी और बीच में सुन्दर सा गार्डन और गॉंव का नज़ारा जहाँ सुबह लोग खेती करते हुए दिखते थे ,थर्ड सेम तो सिंगल रूम मिलने की ख़ुशी ,पकवान खाने में ,रैगिंग लेने में और फ्रेशर्स में, सीनियर्स को फेयरवेल देने में निकल गया जिसकी बहुत सी यादें हैं ,वो साड़ियों का ट्रायल ,वो ड्रेस कोड ,वो मेकअप करना सीखना और फेयरवेल की तैयारी के पीछे हॉस्टल टाइम के बाद हॉस्टल पहुंचना 😂😂और बहुत सारी ट्रीट्स और भी बहुत कुछ।

यहाँ पर मैं एक वीडियो के बारे में बताना चाहूंगी जो मेरी प्यारी सहेली पर फिल्माया गया था वो भी उसकी प्लेट में बैठे चावल के एक एक दाने का 😂😂शायद बहुत ज़रूरी हो 😂 वो बहुत टेंशन में थी पर बाद में पता लगा कैमरा ही ऑफ था 😂😂😂😂😂😂

वो हमारे फैकल्टीज का हॉस्टल कैंपस में घर ,वो सर की बागवानी और सर का गाना जो उन्हें पता नहीं होगा कि हमने सुन लिया था और वो हम पाँचों का हिम्मत करके ,नहीं बहुत ज़्यादा हिम्मत करके सर के घर जाना और बार बार भाग जाना 😂😂😂😂और फिर से हिम्मत जुटा के असाइनमेंट की डेट आगे बढ़वाना और फिर भागते हुए हॉस्टल वापिस आ जाना 😂😂😂😂और असाइनमेंट्स का क़हर अब और ज़्यादा बढ़ गया था ,अब टीपने का एकसूत्रीय कार्यक्रम चलने लगा था पर वो भी पकड़ा गया तो शब्द बदले जाने लगे पर काम चल रहा था और दिन की शुरुवात वैसी ही जैसी गंगोत्री में थी बस यहाँ पानी स्टोर करना होता था ,यहाँ एक मग्गा पानी लेने में उतना ही लौटाना भी होता था बाकायदा निशान लगा के 😂😂 वो हॉस्टल कैंपस गेट पर एकलौती दुकान जहाँ से रिचार्ज और मैगी ली जाती थी ,वो रूम में पुलाव बनाना ,मैक्रोनी और मैगी का वो ज़माना लोहड़ी मनाना ,वो बी ० टेक ० की लड़कियों के साथ यादगार पल ,उनमें से एक यादगार पल है ,दो लड़कियां एक को पकड़ के बाथरूम में फ़ेंक आती थी 😂😂 वो थी शैतानो की नानियाँ ,इतनी ज़ोर से दौड़ती थी लगता था भूकंप आ गया ,शुरू में हमे बहुत गुस्सा आता था पर बाद में हम भी उन्हीं में शामिल हो गए , और यही मुझे मिली मेरी स्कूल की दोस्त तो फिर जान पहचान और बढ़ गयी।

वो शाम की चाय के बाद घूमना ,और क्रश के नाम से एक दूसरे को चिढ़ाना और फिर हमारे सब-जूनियर्स का आना और फिर कुछ ही दिन के मेहमान होने का एहसास होना और पुराने बी ० टेक ० फाइनल का जाना और नया फाइनल का आना और वो रात को घूम के चेक करना की किस के रूम की लाइट जल रही है कौन पढ़ रहा है और फिर खुद सो जाना😂😂😂😂 ,वो एग्जाम के एक दिन पहले बर्थडे मनाना और वो लड़कियों के फुल वॉल्यूम में बजते गानों के बीच उन्हें दुआएं देते हुए पढ़ने की कोशिश करना 😂😂😂😂 हमने सबको बहुत दुआएं दी हैं खासकर अपने टीचर्स को और नामकरण भी किये और मेरा जो दुआ प्रोग्राम शुरू होता था वो ब्रश करने से रात को सोने तक शुरू रहता था 😂😂😂😂

वो हमारा मोबाइल कंप्यूटिंग के एग्जाम की सुबह एक के रूम में इकठ्ठे हो कर आंसू बहाना 😂😂😂😂

वो हर एग्जाम के बाद दुनागिरि जाना और अगले सेम में शुरू दिन से पढाई करने की प्रतिज्ञा लेना और फिर से वही ढाक के तीन पात हो जाना ,और हमारे फाइनल ईयर तक सेवी भी खुल गया था हमारे हॉस्टल में ,तो हमने सेवी का भी आनंद उठा ही लिया आने से पहले।

वो फेयरवेल की तैयारी ,वो फेयरवेल में हमारा धमाल और वो गाना “पल ये हैं प्यार के पल “और सीनियर्स और बी ० टेक ० गर्ल्स की डायरी लिखते लिखते कब अपनी डायरी लिखवाने का टाइम आ गया पता ही नहीं चला ,और मैंने वो हर एक डायरी अभी सम्हाल के रखी है ,क्योंकी ये सिर्फ डायरी नहीं ,यादें हैं ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत लम्हों की जो फिर कभी वापिस नहीं आते तो अगर आप पास आउट हैं तो उठाइये अपनी डायरी और घूम आइये फिर से एक बार अपने प्यारे कॉलेज और अगर आप अभी पढ़ रहे हैं तो खुल के एक एक पल का आनंद लीजिये क्योंकि ज़िन्दगी ये पल फिर नहीं दोहराएगी और रह जाएँगी बस यादें और नम्बर्स जो अब कभी मिलते नहीं क्योंकि सब बिजी हैं व्हाट्सप्प है ,तो जो डायरी में कीप इन कांटेक्ट लिखा जाता है वो कभी फिर होता नहीं ,पर कुछ अच्छे दोस्त भी बनते हैं जो हमेशा साथ रहते हैं और बाकियों की होती हैं तो बस यादें।

अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो माफ़ी चाहूंगी।

धन्यवाद।

4 thoughts on “यमुनोत्री गर्ल्स हॉस्टल @KEC द्वाराहाट

  1. यादो को सुन्दर शब्दो से सवार दिया …..बहुत सुन्दर

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