ये लॉक डाउन आइना दिखा कर जायेगा ||

हमें आइना दिखा कर ही जायेगा ,
साथ ही एक “नया मैं” से भी मिला जायेगा ,
जो शायद बहुत अच्छा खाना बनाता हो या
फिर रंगो से एक नयी दुनियां
बसा देता हो ,या शब्दों का रास्ता बना कर सो गए जो उन्हें जगा जायेगा ,
ये लॉक डाउन ,चार दीवारों के अंदर बसी दुनियां से मिला जायेगा ||
कहीं बनते हुए रिश्तों में प्यार बरसा जायेगा ,तो कहीं बिखरते हुए को संवार कर नया रूप दे जायेगा ,
ये लॉक डाउन ,चार दीवारों के अंदर बसी दुनियां से मिला जायेगा ||
पर  इन मज़बूत और फलती फूलती इन चार दीवारों से दूर ,हुआ करते थे कुछ कच्चे घर ,
कुछ ईंटों से बने या फिर मिटटी से लिपे ,
उनमें भी एक दुनियां बसा करती थी ,
जहाँ सुबह शुरू होती थी शाम की रोटी की दरकार से
और निकल पड़ते थे इसी जद्दोजेहद में उन मज़बूत दीवारों को बनाने ,उसके अंदर बसे घर को सजाने ,पर ये लॉक डाउन उनकी रोटियां ले गया ,घर बनाने वालों को बेघर कर गया ,

जो तपती धूप में तो कभी बारिश में बिना रुके सबको मंज़िल तक पहुंचाते थे ,
ये लॉक डाउन उनको बस पेट की अकड़न ,बसों के धक्के और कुछ अपनों का बिछाव दे गया ,
कहीं अनाथ होते बच्चे ,कहीं मिट गया एक पूरा परिवार ,कही एक रोटी के लिए आत्मसम्मान को तोड़ती मजबूरी ,
कहीं ये कभी न ख़त्म होती मीलों की दूरी ,
पर हाँ कहीं ये रास्तो में बेबसी बनकर मीलों की दूरी तय कराएगा ,
अपने पैरों पर ही भरोसा कर जो चल पड़े हैं अपने घरों की तरफ ,
कुछ भूखे पेट ,एक माँ के दिल उठती कसक और बाप की लाचारी ,
“आत्मा निर्भर” से उनको रहम का महज़ एक जरिया बनाकर जायेगा |
ये लॉक डाउन आइना दिखा कर जायेगा ||
आइना अपने समाज का जिसमें सिर्फ खुद की परवाह है ,शून्य हो चुके एहसास हैं,
पर हाँ ये ज़िंदा हैअभी भी कुछ फरिश्तों में ,जो इनका दर्द समझते हैं ,
सलाम है उनको जो इंसानियत का चेहरा बनकर इसे ज़िंदा रखते हैं ,
क्योंकि लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर ज़िंदा है ,
अरे भाई सोशल डिस्टैन्सिंग भी तो करनी है ,पर लोगो से नहीं ,है इंसानियत से ,
अगर सोशल मीडिया पर फैलाना ही है तो कुछ अच्छा फैलाइये ,
अभी इस दौर में सिर्फ इंसानियत का ही धर्म निभाइये ,
अपने अंदर के इंसान को जगाइए ,शायद ,
ये लॉक डाउन आइना दिखा कर ही जायेगा ||

घर पर रहें ,स्वस्थ रहें ,सुरक्षित रहें |
धन्यवाद् |

19 thoughts on “ये लॉक डाउन आइना दिखा कर जायेगा ||

  1. Kuch to shayad sarkar bhi mazbur h,
    wo koi bada admi nahi ek mazdur h…
    Pet m bhook h,pav m pade chhale h,
    Dur h manzil,par kaha thakne wale h.. lakho ghar banaye, ab ye hi khule gagan k niche h,
    Kitne hi bagh-baghiche inhone apni mehnat se siche h…
    Bhuke h pyase h, na koi inka ab neta h,
    Kai k pair nahi chappal, koi patri pe leta h..
    Sone ki chidiya nahi banna hame,sone se kaha pet bharta h,
    Do roti kapda aur basera isi se jeevan chalta h…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

15 + eighteen =