वो एक कोना

जहाँ खुद से मुलाकातें हो ,
जो कभी न समझ पाए वो बातें हो ,
बातें जो बीत चुकी हैं ,या जो चल रही है,
उन्हें परखना हो या फिर कुछ नया लिखना हो ,
जहाँ शब्द जन्म लेते हैं , सोच से निकल कर लोगो तक पहुंचते हैं ,
क्यों न कुछ नया किया जाये से ,चलो शुरू करते हैं तक का सफर ,
कभी कुछ मिनटों में तो कभी कुछ घंटों में ही तय हो जाता है ,
और गंतव्य से लक्ष्य की तरफ बढ़ते जाते हैं ,
सुबह की चमकती धूप का कुछ हिस्सा जिसे रोशन कर जाता है ,
एक गरम चाय की चुस्की ,और कुछ किताबें ,
योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास करती एक डायरी हो ,
या फिर लैपटॉप पर दौड़ती अंगुलियां जो मीलों का फासला  मिनटों में तय कर लेती है ,
एक ख्याल,जो कभी कविता या कहानी या कभी विचारों का रूप धर लेता है ,
वो ठंडी सी हवा जिसे महका जाती है ,उन खिड़कियों क खुलने के साथ ,
मन के और विचारों के दरवाज़े भी खोल देती है ,
वो दो दीवारों से मिला एक कोना ही तो है ,
कुछ ईंटों और सीमेंट से बना ,रंग चढ़ाये हुए खुद पे दुनियादारी का ,
हज़ारों बारिशें,तूफ़ान और चिलचिलाती धूप के बाद भी अडिग खड़ा है जो ,एक घर को खुद में समेटे ,
वो एक कोना ,
जहाँ सुबह की चाय का सुकून है ,ठंडी हवा का एहसास है ,
खुद के लिए हरपल कुछ ख़ास है,
ज़िन्दगी से बहुत कुछ सीख कर, हरपल आगे बढ़ने का विश्वास है ,
ढूंढ लीजिये एक कोना अपनी ज़िन्दगी में ,जहाँ खुद से मुलाकातें हो,
जो कभी खुद से भी न कह पाए वो बातें हो ,
वो एक कोना ॥
जहाँ मेरी कल्पनाएं शब्दों में ढल कर आप तक पहुँचती है ,
जहाँ मेरे चश्मे में से धूप गुजरती है ,
जहाँ हर दिन मैं फिर से नयी सी बन जाती हूँ ,जहाँ मैं बस अपने साथ होती हूँ ,
वो एक कोना ॥

धन्यवाद ।

12 thoughts on “वो एक कोना

  1. ये कोने में बैठ कर खुद से ही बाते करना बहुत दिलचस्प होता हैं। दिल को एक सुखद अनुभूति का एहसास कराता ह
    बहुत अच्छा लगा आपका खुद से कुछ पल बाते करने का ये जो एहसास अपने हम सबके साथ सांझा किया । और आगे भी इंतजार रहेगा ।🙏🙏🙏🙏🙏👌👌👌👌👌👌👌👌

  2. स्वयं की स्वयं से पहचान !स्तब्ध कर गए मुझको दिल की गहराइयो मे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

one × four =