वो एक  रिक्शावाला।।

तीन पहियों पर अपने परिवार की रोटियां सेकता वो ।
अपनी कमजोर टांगे और जर्जर हो चुके बूढ़े शरीर से ,
मुसाफिरों को मंज़िल तक पहुंचाकर ,अपनी ज़िन्दगी के पहियों को आगे बढ़ाने की भरसक कोशिश करता वो ।
धूप,बारिश और जाड़ा ,सब से दोस्ती गांठ कर ,
 पानी की कुछ घूंट से अपनी मजबूरियों को बहलाता वो ।
 वो एक रिक्शावाला।।
बहुत कुछ सिखा गया , हरपल आगे बढ़ने की आस ,
तूफानों से लड़कर जीतने की हिम्मत,
मुश्किलों के आगे घुटने न टेक कर ,उनसे लड़ने की सीख ,
 ज़िन्दगी  का आइना दिखा गया ,
वो एक  रिक्शावाला।।

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