वो खूबसूरत सा गुलाबी पेड़ और उसकी यादें -बोगनवेलिया

जून में जब अल्मोड़ा गयी तभी वहां मुझे अपने शहर पहुँचने का एहसास कराता वो गुलाबी फूलों से भरा पेड़ माल रोड में दिख गया और मन अपनेपन के एहसास से और वापिस अपने शहर में कदम रखने की ख़ुशी से भर उठा |
जब हम अपने शहर और अपने घर में होते हैं तब हमें इसकी महत्ता का एहसास ज़रा कम होता है पर एक बार शहर से विदाई हो जाये तो ये शहर सपनों में भी पीछा नहीं छोड़ता और हमेशा मन में अपने शहर की याद बसी रहती है और ज़िन्दगी आगे बढ़ती है और हम पीछे छोड़ आये अपने शहर की हर चीज़ से दिल से जुड़ जाते हैं |
बस यही रिश्ता था उस गुलाबी पेड़ से हमारा और सच कहूं तो जब 8 जुलाई को पेड़ के गिरने की खबर मिली तभी मुझे पता लगा कि उस खूबसूरत गुलाबी पेड़ का नाम बोगनवेलिया था और मन में ऐसा लगा कोई अपना जैसे बिछड़ गया ,मन भारी हुआ मन किया कि थोड़ा रो ले पर भारी मन लिए ही बैठे रहे क्योंकि सब शायद मज़ाक उड़ाते पर सब लोग अल्मोड़ा ही हैं,दूर तो बस बेटियां होती हैं अपने शहर से ,अपनी यादों से और जब भी वो अपने शहर आती हैं तभी वो भर लेना चाहती हैं इस नए हो चुके शहर में अपनी पुरानी यादें|
पेड़ का नाम मुझे कभी नहीं पता था पर हाँ उस पेड़ के साथ यादें बहुत जुड़ी थी ,कॉलेज के रास्ते में एक ठहराव सा लिए वो गुलाबी सा पेड़ ,गर्मियों में छाँव देता और कभी बहुत सी अनजान और कुछ जानी पहचानी आवाज़ों के शोर से मिलकर गुनगुनाता वो खूबसूरत सा गुलाबी पेड़ और शादी के बाद मेरे मायके की शान वो गुलाबी पेड़, जब गर्व से कहते थे कि देखा है कहीं ऐसा पेड़ जैसा हमारे अल्मोड़े में है |
उस गुलाबी पेड़ के बारे में मुझे ज़्यादा जानकारी तो नहीं है और ईमानदारी से कहूं तो मुझे ये भी नहीं पता था कि वहां पर एक देवदार का पेड़ भी है ,हमें आते जाते वहां कभी कुछ लोग बैठे हुए दिखते थे ,जानने को बस इतना ही जानती थी उस पेड़ के बारे में पर मेरे साथ उसकी अनगिनत यादें जुड़ी है ,यादें मेरे बचपन की,कॉलेज की शुरुआत की ,बाहर से आने पर सबसे पहले उस पेड़ को देखना मन को हमेशा ही ख़ुशी से भर देता था ,मेरे मायके पहुँचने का एहसास करवाता वो गुलाबी पेड़ अब शायद मेरे मायके जाने पर मेरा इंतज़ार करता हुआ नहीं मिलेगा ,अब गाड़ी की खिड़की से मुझे वो गुलाबी पेड़ नहीं दिखाई देगा |
आँखों में आंसू लिए जब शहर छोड़ती है बेटियां अब ये उनको विदा करने वहाँ नहीं मिलेगा पर हाँ  ये सदा हमारी यादों में ज़िंदा रहेगा ,वो खूबसूरत सा गुलाबी पेड़ ,अल्मोड़ा भी वहीं, सब वहीं बस अब वो गुलाबी पेड़ नहीं दिखेगा |
ये थी उस गुलाबी से पेड़ की कुछ खूबसूरत यादें और उससे जुड़ी भावनाएं ,अल्मोड़ा की एक बेटी की नज़र से ,उसके मायके की पहचान , उसी गुलाबी पेड़ की यादों के साथ फिर मिलेंगे अल्मोड़ा की गलियों में |

6 thoughts on “वो खूबसूरत सा गुलाबी पेड़ और उसकी यादें -बोगनवेलिया

  1. Woh gulabi bogunvilla का पेड़, जिसके बिना अलमोड़ा के माल रोड की कल्पना नहीं की जा सकती।आठ वर्ष हम वहां रहे, दूर रहकर भी एक जुड़ाव महसूस करती हूँ ‘Pinky’ k saath.

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