हाँ सच कड़वा होता है ||

सच भी कितना कड़वा होता है न ,
अगर झूठ बोलो तो सब खुश रहते है ,
बस ज़रा सा सच सुन कर जब खुद को ही महसूस कर लेते हो न तब ये कड़वा बन जाता है ,
हाँ सच ,ये सच कड़वा बन जाता है ||
जब उसने
“क्यों ?तुझे सुनाई नहीं देता?” पढ़ी थी ,
तब भी पढ़ने वाले दो लोग थे ,एक जिन्हें बहुत पसंद आया ,
और एक वो ,जिन्हें कभी सुनाई नहीं दिया पर ,अब उन्हें आइना दिख गया ,
और उनके लिए ये सच कड़वा बन गया ||
“लॉक डाउन ने भी आइना दिखा ही दिया”,
झूठे वादों का सच ,जो सिर्फ अमीरों के ही हक़ में होता है ,
गरीबों को कहाँ कोई हक़ मिलता है ,
उन्हें मिलती है तो बस दुत्कार ,झूठे वादे ,
नंगे पाँव से दिल तक पहुँचते कुरेदते ज़ख्मों की किरचें ,
जो चुभ कर बह निकलती है उसकी आँखों से ,कभी सोशल मीडिया पर जनता का दर्द बन कर छलकती है ,
और शायद कभी कुछ अच्छे परिणामों में तब्दील भी हो जाये,कभी ,
क्योंकि सच कड़वा ही होता है ,मीठा तो बस झूठ ही होता है ,हाँ सच कड़वा होता है ||
“बँटी हुई दुनियां” पढ़कर ,कुछ को आईना दिखा होगा ,
कभी तो उन्होंने भी” गुलाबी रंग” को ताना दिया होगा ,कभी उसने भी किसी को “जोरू का गुलाम” तो कहा होगा ,
इनकी कड़वाहट बहुत दूर तक फैली हुई है,क्योंकि सच ,सच में बहुत कड़वा होता है ,
एक ओर वो भी है ,जिसने , अपने प्यार जताने पर ,हाथ बँटाने पर ,
शर्म का घेरा तोड़ कर “हाँ मैं सही हूँ” से हाथ मिलाया है ,
हाँ ये रिश्तों में कहीं प्यार बन कर छाया है ,
क्योंकि सच कड़वा ज़रूर है पर एक दिन जीतता ज़रूर है ,
यूँ ही नहीं “मुण्डक उपनिषद” में कहा गया है ,”सत्यमेव जयते”||
“मेरा भाई” पढ़ कर ,किसी भाई या बहन ने तो पुराने पल अपने आज में भिगोये होंगे ,
और जिन्हें कभी परवाह ही नहीं रही ,हाँ उनके मुँह में कड़वाहट तो ज़रूर आयी होगी ,
क्योंकि सच कड़वा होता है ,हाँ बहुत कड़वा ,
एक सच जाने कितने रिश्ते तोड़ देता है ,क्योंकि सबको सच नहीं झूठ अच्छा लगता है ,
झूठ की बुनियाद पर बने रिश्ते कब तक टिकेंगे ,इसीलिए आजकल रिश्ते भी खोखले हैं ,
ज़रा सा सच बोलने पर टूट जाते है ,क्योंकि झूठे ही सही पर कहीं तो ये सच से मिलेंगे ,
क्योंकि आज भी झूठ की उम्र कुछ ज़्यादा हो भी तो ,अंतहीन सच ही रहेगा ||
सत्यमेव जयते ||

6 thoughts on “हाँ सच कड़वा होता है ||

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