हाँ ,हमें इस नयी दुनियां में जीना सीखना होगा ||

आज मुलाकात हुई ,फिर से उसी पुरानी दुनियां में ,
और फिर से मैं “आज” में आ गयी ,क्योंकि चेहरों पर लगा मास्क जो देख लिया था ,
और खुद को यकीन दिला लिया ,कि  हाँ  .यही अब हमारी नयी दुनियाँ है ,आखिर कब तक समय को रोक पाएंगे ,
और स्वीकार कर लिया कि शायद ऐसे ही जीना होगा ||
मास्क जो अब लगे हैं, दिखाई तो देते हैं ,
क्योंकि मास्क तो पहले भी लगे थे ,एक चेहरे पर हज़ार चेहरे थे ,
पहचानना मुश्किल था कि असली कौन सा है ,
अच्छा ही हुआ जो मास्क लगाया है ,अब मास्क दिखता तो है और चेहरा छुप गया है ,
अच्छी है सोशल डिस्टैन्सिंग ,लोग मिलेंगे नहीं ,तो बातें नहीं होंगी ,

कम से कम हज़ारों चेहरों में असली चेहरा ढूंढने की मशक्कत तो नहीं करनी होगी ,
कितने ही माता पिताओं को बेटी की शादी के लिए क़र्ज़ में डूबने से ,मुक्ति मिलेगी ,
क्या पता इसी बहाने किसानों को भी कुछ फायदा हो जाये क्योंकि लोग अब घरों में सादा खाना खाने लगे हैं ,
सोशल डिस्टैन्सिंग बहुत अच्छी है ,
अब सबकी ज़िन्दगी की परवाह करने वाले चार लोगों को भी कुछ आराम होगा ,
उनके आराम करने से बाकियों की ज़िन्दगी का कुछ तनाव तो कम होगा ,
न बच्चों के रिजल्ट की चिंता ,बड़ों के कम्पटीशन के बीच पिसता बचपन कुछ तो आबाद होगा ,
गावों मैं रौनक लौट आयी है ,बरसों बाद सूनी आँखों में फिर से अपने बच्चो से मिलने की ख़ुशी दिखाई दी है ,
ऑटो फिर से सड़कों का साथ देने लगे हैं ,पर हमें भी नियमों का पालन करना होगा ,
हाँ हमें इस नयी दुनियां में जीना सीखना होगा||
मास्क और सैनिटाइज़र ,सोशल डिस्टैन्सिंग के साथ ही इस नयी दुनियां में आपका जीवन है ,
इनके बिना अब गुज़र न हो पायेगी ,
हाँ ,हमें इस नयी दुनियां में जीना सीखना होगा ||

 

5 thoughts on “हाँ ,हमें इस नयी दुनियां में जीना सीखना होगा ||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eleven + 16 =