बेड़ू रोट और मेरे बुबु के किस्से

बचपन में घी संक्रांति खुशियों भरा त्यौहार होता था ,खुशियाँ आज भी लाता है ये त्यौहार पर बचपन की बात ही कुछ और थी, हमें एक दिन पहले से ही ख़ुशी हो जाती थी कि घी का त्यौहार आएगा और हम बेड़ू रोट खाएंगे । तब हमें ये भी नहीं पता था कि जिस दाल […]

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आओ फिर से “ठेठ पहाड़ी बन जाए “

जंगल जल रहे हैं ,प्रकृति अपना तांडव दिखा रही है , यूँ ही नहीं “गौरा देवी” ने “चिपको” चलाया था ,एक “कल्याण सिंह” ने “मैती आंदोलन” चलाया था, भूल ही जाते हैं हम उनके योगदान को ,बस किताबों के कुछ पन्नों में ही उनका ज़िक्र है , क्योंकि हमें “पर्यावरण” से ज़्यादा एग्जाम की फिक्र […]

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