वो दोस्त जो हमसफ़र बन जाते हैं

बचपन में वो यारों का मजमा,
वो स्कूल के रास्ते ,कुछ स्कूल के दोस्त,
और मोहल्ले में अपना ही एक गुट होता था,
हाँ वो यारों का ज़माना ही तो होता था।
उम्र के साथ दोस्त भी बदलते गए ,
कुछ किस्सों में बाकि रह गए और कुछ हमेशा के साथी बन गए ,
वो स्कूल की मस्ती और इंटरवल की घंटी ,
आज़ादी का एहसास लाती थी और दोस्तों के साथ बिताये पल ,
एक दिन यादगार लम्हें बन जायेंगे तब न इसकी खबर थी ,
और उन्हीं यादों के साथ स्कूल भी छूट गया और दोस्त भी बिछड़ गए ,
और फिर कॉलेज में शुरू हुआ एक नया सफर अपनी दोस्ती का ,
वो कॉलेज की पहली क्लास ,वो नए नए दोस्त ,

और शुरू हो गया फिर यादें बनाने का सिलसिला ,
और फिर एक दिन फिर नए सफर पर चल निकले पर कुछ दोस्त ऐसे मिले ,
जो हर सफर में हमसफ़र बन गए ,
बड़ी से बड़ी परेशानी को मज़ाक में उड़ाते उड़ाते ,जाने कब परेशानी ही उड़ा देते हैं ,
खुशियों को जो हज़ार गुना बढ़ा देते हैं,
गिरने से पहले ही जो सम्हाल लेते हैं ,
वो दोस्त जो हमसफ़र बन जाते हैं ,
और ज़िन्दगी को रोशन बना देते हैं ।
घर से दूर होने पर जो खुद ही हमारा परिवार बन जाते हैं ,
बिना रिश्ते के भी जो सच्चाई से रिश्ता निभाते हैं ,
हंसी की फुहार बन के जो ज़िन्दगी में बिखर जाते हैं ,
मुश्किल से मुश्किल घड़ी को भी जो आसान बनाते हैं ,
गिरने पर जो हौसला बढ़ाते हैं ,
वो दोस्त जो हमसफ़र बन जाते हैं ,
और ज़िन्दगी को रोशन बना देते हैं ।

4 thoughts on “वो दोस्त जो हमसफ़र बन जाते हैं

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