अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (international girl child day )

आज अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है और मेरे व्हाट्सप्प लिस्ट में सिर्फ एक लड़की को ये याद था शायद,और सबसे ज़्यादा शर्म की बात ये है कि मुझे भी याद नहीं था और उसका स्टेटस देखने के बाद मुझे एहसास हुआ की यही वो मुद्दा है जिसपर मैं हमेशा से कितना कुछ लिखना चाहती थी,पहले एक बेटी के दिल से और आज एक माँ के दिल से ,बहुत कुछ है कहने को।
चलिए शुरू करती हूँ,बेटियों के बारे में क्या लिखुँ जो खुद ही एक सुन्दर कविता सी होती है ,ज़िन्दगी को रोशन करती है ,आपके आंगन में चिड़िया सी चहकती रहती हैं पर इतना आसान नहीं बेटी बन पाना क्योंकि संघर्ष तो उसी दिन से शुरू हो जाता है जिस दिन आपको पता लगता है कि आप गर्भ से हैं,फिर सुनिए लोगों की बातें।

अगर पहला बच्चा है तो पहला बेटा ही हो तो अच्छा है फिर दूसरे में टेंशन नहीं रहती ,बेटी भी हो तो चलेगा ।
अगर दूसरा बच्चा हो और पहली बेटी है तो बेटा ही होगा और अगर माँ गलती से भी ये बोल दे की बेटी भी हो सकती है तो जवाब सुनने लायक है ,अच्छा अच्छा बोलो और अच्छा सोचो तो अच्छा ही होगा और ये बोलने वाली भी एक औरत ही होती है ,और उन सभी औरतों से मेरा एक ही सवाल है कि अगर बेटा होना अच्छा है और बेटी होना ख़राब तो सबसे पहले तो आपको ज़िंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि आप भी एक लड़की हो और ये औरत कोई भी हो सकती है ,आपकी अपनी माँ ,सास ,बहिन या फिर कोई दोस्त या रिश्तेदार और ये लोग उस माँ के मन में बस यही भरते रहते हैं कि बेटा ही होगा और फिर मन्नतों पर मन्नते ,तावीज़ो पर तावीज़ ,मंदिरो घूमना और मन्नत भी मांगेंगे तो वैष्णो देवी जाकर कि बेटा देना ,किस मुँह से जा पाते हो देवी के सामने ??
आज फिर भी हालात बहुत हद तक सही हैं ,पहले तो औरते बेटे कि चाह में बेटियाँ पैदा करते करते चल बसती थी और जिन लड़कियों का भाई न हो तो उनसे लोग शादी करने में भी कतराते हैं फिर जब से पेट में ही भ्रूण का लिंग पता लगने लगा तो बेटों की
संख्या बढ़ी और बेटियों की संख्या घटती गयी ।
सरकार के लिंग परीक्षण पर रोक लगाने से अब लोग सीधे देसी टोटके अपनाते है और उस गर्भवती महिला के मानसिक हालात क्या रहते होंगे जब वो बेटे की आस लिए एक बेटी को जन्म देती है ,क्या फिर वो अपनी बेटी को स्वीकार कर पाती होगी ??
स्वीकार करती है पर बहुत समय बाद ,क्यों एक माँ के मन में उसके बच्चों के लिए भेदभाव पैदा करते हो वो भी खुद एक औरत होकर ,इसी से जुड़ा एक किस्सा आज भी मुझे याद है ,तब जब मेरी बेटी हुई थी ,मेरी पहली बेटी हुई और साथ में एक महिला की दूसरी बेटी हुई और सब बोल रहे थे बेचारी की दूसरी भी बेटी हो गयी और जब मैं उसे बधाई देने गयी उनके चेहरे के भाव आज भी याद है मुझे कितनी घृणा थी उस माँ के अंदर उस छोटी सी बच्ची के लिए ।
क्यों बेटी होना गलत है ? ख़राब है ?इसका जवाब ज़्यादातर लोगो के पास सिर्फ यही है कि वंश बढ़ाने के लिए बेटा चाहिए तो ये जवाब सुनकर मुझे हलचल फिल्म का वो डायलाग याद  आता है कि क्या हम डायनासौर की आखिरी पीढ़ी है ,पर हां बेटियों की आखिरी पीढ़ी तक हालात ज़रूर पहुँच जायेंगे क्योंकि जब वो पेट में ही सुरक्षित नहीं तो बाहर आने पर हालात और भी बुरे हैं और आजकल की घटनाएँ पढ़ के सच में बेटियाँ पैदा करने में डर लगता है।
अभी एक और विकल्प है बेटियों के लिए अगर किसी का बच्चा नहीं हो रहा है तो उसके लिए सब यही प्रार्थना करते हैं की कुछ नहीं एक बेटी ही हो जाती बेचारी की ,मतलब बेटी को समझ क्या रखा है ,क्या है वो आपकी नज़रों में ?
बहुत से बुज़ुर्गों को मैंने ये भी कहते सुना है कि बेटियाँ तो हो जाती हैं ,बेटे परेशान करते हैं और है आपकी इस बात से मैं सहमत हूँ बेटियां तो सच में हो जाती है फूल जैसी खिलने के लिए और बेटे परेशान ही करते हैं तो आपका फ़र्ज़ नहीं बनता कि एक औरत होने के नाते आप अपने बेटों को बेटियों का सम्मान करना सिखाये खैर जिस समाज मैं एक औरत ही बेटी के होने को गलत मानती है और औरत ही औरत का सम्म्मान नहीं करती तो वहां के पुरुषों से क्या उम्मीद रखी जा सकती है ,यहाँ पर मैं सभी महिला पुरुषों को गलत नहीं कह रही हूँ पर अधिकतर की सोच यही होती है और इस सोच से मेरा सामना बहुत बार हुआ है बस फर्क इतना है कि मेरी सोच को कोई और प्रभावित नहीं कर सकता है और मुझमें हिम्मत है दो बेटियों को ख़ुशी से जन्म देने कि और ऐसी मानसिकता को मुँह तोड़ जवाब देने की और मैं खुशनसीब हूँ कि मेरे जीवनसाथी के और मेरे विचार इस विषय पर समान हैं और ये लेख एक छोटी सी कोशिश है ऐसी मानसिकता को मिटाने की और सभी औरतों और लड़कियों से बस एक ही निवेदन हैं कि बुज़ुर्गों की सोच हम नहीं बदल सकते पर  हम अपनी सोच को बदल सकते हैं तो आइये निर्माण करे एक ऐसे समाज का जहाँ दूसरी बेटी होने पर भी मिठाई बांटी जाये और ख़ुशी से उसका भी नामकरण भी मनाया जाये और माँ प्यार से दूसरी बेटी को गोद में लेते ही ख़ुशी से भर उठे।
आप सभी को नवरात्री की बधाई ।
पढ़ने के लिए धन्यवाद ।

10 thoughts on “अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (international girl child day )

  1. “बेटियों का भविष्य जैसा होंगा वैसा ही हमारे समाज का भविष्य होंगा!”
    “खुद टूटकर भी परिवारों को जोडती है बिटिया!!”
    “कोई परिवार तब तक ही खुश रह पाता है जब तक की ये बेटिया खुश रह पाती है!!”
    “खुद्द संतोष कर घर में खुशिया बिखेरती है ये बेटिया!!”

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