नेपाल के प्रधानमंत्री के०पी०शर्मा ओली का नया दांव

कई महीनों के विवाद के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री के०पी०शर्मा ओली ने विजय दशमी पर नेपाल के पुराने नक़्शे से लोगो का अभिनन्दन किया।
स्त्रोत – द हिन्दू
जी हाँ नेपाल का पुराना नक्शा जिसमें कालापानी,लिपुलेख, लिम्पियाधुरा नेपाल की सीमा में नहीं है और जिसपर विवाद उठा था।
आइये जानते है कि ये विवाद क्या है ?
यह विवाद तब से शुरू हुआ है जब से भारत ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 2019 में अपना नया नक्शा जारी किया था।
मई 2020 में नेपाल ने नया नक्शा जारी किया और 13 जून को संशोधन के तहत इसे मान्यता दी गयी और इस नक़्शे में कालापानी को नेपाल का अधिकार क्षेत्र बताया गया बस तभी से ये विवाद शुरू हुआ है।

आइये जानते हैं कालापानी के बारे में –
कालापानी दरअसल पिथौरागढ़ जिले के सबसे पूर्वी कोने में स्थित है और संगौली की संधि के तहत नेपाल ने इस पर अपना अधिकार छोड़ दिया था ।
संगौली की संधि (1816 )-
गोरखा नेपाल के हुआ करते थे, 1791 में इन्होने अल्मोड़ा पर अधिकार कर लिया और 1804 में खुड़बुड़ा के युद्ध में इन्होंने कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में अपना अधिकार जमा लिया, इस निर्णायक युद्ध में गढ़वाल के राजा प्रद्युमन शाह वीर गति को प्राप्त हुए ।
जहाँ पूरे देश में अंग्रेज़ों के अत्याचार पूर्ण शासन से जनता त्रस्त थी वहीं कुमाऊं गढ़वाल में जनता गोरखों के अत्याचार पूर्ण शासन से त्रस्त थी जिसके मुकाबले उन्हें अंग्रेज़ों का शासन राहत देने वाला लगता था, गोरखों के शासन को गोर्ख्याली कहा जाता था।
गोर्ख्याली शासन से त्रस्त होकर प्रद्युमन शाह के पुत्र सुदर्शन शाह ने अंग्रेज़ों से मदद मांगी, और कई युद्ध और संधियों के बाद गोरखों और अंग्रेज़ों के बीच 28 नवम्बर 1815 को संगौली की संधि हुई ,संगौली जो कि बिहार का चम्पारण जिला है ।
पर संगौली की संधि को नेपाल ने मानने से मना कर दिया और 1816 में गोरखाओं की हार के बाद नेपाल ने संगौली की संधि मान ली

आइये जानते है संगौली की संधि की शर्ते –
इस संधि के अनुसार गोरखाओ ने कुमाऊं और गढ़वाल के जिले अंग्रेज़ों को सौंप दिए ।
गोरखाओं ने दक्षिणी सीमा के किनारों की निचली भूमि पर अपना दावा छोड़ दिया ।
और इस हिसाब से कालापानी भारत के अधिकार क्षेत्र में आ गया जिसे अभी नेपाल ने अपने नए नक़्शे में दिखाया था, कालापानी काली नदी का उद्गम क्षेत्र भी है और काली नदी नेपाल से उत्तराखंड की सीमा भी बनती है जिसके तहत इसके पश्चिमी क्षेत्र पर भारत का अधिकार है और पूर्वी क्षेत्र पर नेपाल का ।
बाकि संगौली की शर्ते वही थी जो सामान्यतः अंग्रेज़ो की नीति थी कि अंग्रेज़ जब भी किसी राज्य कि मदद करते थे वह पर ब्रिटिश रेजीमेंट कि स्थापना ज़रूर होती थी और भारत में इस नीति के तहत वो सब अपने अधिपत्य में ले चुके थे इसलिए उन्होंने काठमांडू में भी ब्रिटिश रेजीमेंट की स्थापना करवाई ।
ये था कालापानी पर नेपाल और भारत का विवाद और अब नेपाल के प्रधानमंत्री का विजय दशमी पर पुराने नक़्शे से अभिवादन करने को क्या यह माना जाये कि उन्होंने कालापानी पर भारत का क्षेत्राधिकार स्वीकार कर लिया है ?
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धन्यवाद ॥

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