आज का दिन 10 नवंबर

आज का दिन 10 नवंबर, इस दिन क्या हुआ था आइये जानते हैं,
आज के दिन, 10 नवंबर 1908 को भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ने के लिए क्रन्तिकारी कन्हाई लाल दत्त को फांसी दी गयी थी ।
बहुत से लोगो ने शायद इनका नाम भी नहीं सुना हो तो आइये जानते हैं कन्हाई लाल दत्त जी के बारे में ।
इनका जन्म 30 अगस्त 1888 को पश्चिम बंगाल के चन्दन नगर में जन्माष्टमी के दिन हुआ था, इसीलिए इनका नाम कन्हाई पड़ा ।
स्नातक करने के दौरान इनके शिक्षक चारु चंद्र राय के संपर्क से इन्हें क्रांति के पथ का ज्ञान हुआ ।
ये बंगाल की पत्रिका युगांतर से जुड़े हुए थे, ये एक साप्ताहिक बंगाली समाचार पत्र था जो कि एक क्रन्तिकारी पत्र था जिसकी स्थापना कलकत्ता में 1906 में वारीन्द्र कुमार घोष, अविनाश भट्टाचार्य एवं भूपेन्द्रनाथ दत्त ने की थी ।
इसके साथ ही कन्हाई लाल दत्त, क्रन्तिकारी संस्था अनुशीलन समिति से भी जुड़ गए, जहाँ क्रांतिकारियों का प्रशिक्षण तथा बम बनाने का कार्य भी होता था और कन्हाई लाल ने इसकी एक और शाखा खोली ।
खुदीराम बोस के मुजफ्फरपुर कांड के बाद अँगरेज़ चौकन्ने हो गए थे और क्रन्तिकारी गतिविधियों पर खास नज़र रखे हुए थे, तभी किसी देशद्रोही ने अनुशीलन समिति के बारे में अंग्रेज़ों को सूचना दे दी और मानिकतल्ला स्थित अनुशीलन समिति से 35 लोगो की गिरफ़्तारी हुई, जिनमें कन्हाई लाल भी शामिल थे ।
गिरफ़्तारी के बाद इनके एक साथी नरेंद्र नाथ गोस्वामी ने अंग्रेज़ो का पिट्ठू बनना स्वीकार कर लिया, मतलब उनके लिए गवाही देने के लिए तैयार हो गए, और कन्हाई लाल और इनके साथी सत्येंद्र नाथ बोस ने देशद्रोही को मारने की ठान ली और उसकी योजना बना कर इन्होने नरेन्द्रनाथ गोस्वामी कि हत्या कर दी और कन्हाई लाल दत्त जी ने हत्या का दरोमादार अपने सर ले लिया और 10 नवंबर 1908 को मात्रा 20 वर्ष की आयु में एक महान क्रन्तिकारी देश के लिए शहीद हो गया
पर दुःख की बात यह है कि हम आज भी सिर्फ कुछ ही क्रांतिकारियों को जानते है और उनके लिए आपस में लड़ भी रहे हैं, देश की आज़ादी में सिर्फ मुट्ठी भर लोगो का हाथ नहीं है, देश के हर कोने में क्रन्तिकारी गतिविधियां हुई, कितने ही लोग फांसी चढ़े , कितने शहीद हुए पर हमारे देश को केवल वही नाम याद हैं जो उन्होंने सोशल मीडिया के मेम्स में देखे हैं और उसी के आधार पर वो अपने देश के इतिहास को देख रहे हैं, बस दो चार गिने चुने नामों पर ही बहस होती है, एक कहता है गाँधी ने आज़ादी दिलाई, दूसरा भगत सिंह और बोस और कोई नेहरू, क्या आज़ादी सिर्फ इन चार पांच लोगो की वजह से मिली है, नहीं, जब देश के जाने कितने नौजवान फांसी पर झूले, जाने कितने ही शहीद हुए, कितने लाठीचार्ज सहे, जाने कितनी यातनाएं जेल में सही तब जाकर मिली है हमें आज़ादी और हमें कोई अधिकार नहीं कि हम किसी एक भी क्रन्तिकारी या उस समय कि जनता के बारे में कुछ भी बोले पर हां बहुत ज़रूरत है अपने देश के इतिहास को पढ़ने की, उसे जानने की और सही बातें और तथ्य को फ़ैलाने की क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम सिर्फ देश के एक कोने में चार पांच लोगो ने नहीं किया था, इसमें महिलाएं भी शामिल थी और शामिल था भारत देश का हर नागरिक।
इसलिए अपने इतिहास को जानिए और आज़ादी के लिए जिन लोगो ने योगदान दिया है उन सभी का सम्मान कीजिये और सोशल मीडिया पर भूले हुए नायकों से देश का परिचय करवाइये ।
धन्यवाद् ।

चित्र साभार- विकिपीडिया

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