मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी

मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी ?
आजकल हमारे आस पास जो भी घटनाएं देखने को मिल रही हैं वो बस यही सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य कितना ज़रूरी है और रह रह कर यही सवाल दिमाग में कौंधता रहता है।
आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य उतना जरूरी हो गया है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य पर दुःख की बात यह है कि लोग शारीरिक स्वास्थ्य को ही महत्ता देते आये हैं और अगर बात मानसिक स्वास्थ्य की हो तो लोग पागल घोषित करने में ज़रा भी देर नहीं लगाते।
ज़रूरत है मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सतर्क होने की ,क्या वजह रही होगी जो एक हँसता खिखिलाता इंसान अपनी ज़िन्दगी से हार जाता है और ऐसे में विश्वास करना कठिन होता है की कैसे इतना ज़िंदादिल इंसान इतना बड़ा कदम उठा लेता है ।
क्या वजह होती है कि हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को पहचान नहीं पाते और यहाँ पर मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूंगी कि बहुत अंतर है दिमाग ख़राब होने में और मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने में,दोनों ही अलग अलग बातें हैं ।
किसी भी इंसान कि मानसिक स्थिति दो कारणों से प्रभावित होती है ,पहला बाहरी दुनिया और दूसरा उसका अंतर्मन ।
बाहरी लोगो से ,अपने लोगो के व्यवहार से या कुछ कठिनाइयों से इंसान कि मानसिक स्थिति पर बहुत प्रभाव पढता है और दूसरा कारण है उसके खुद के आतंरिक अनुभव से ।
आखिर क्या वजह है कि एक तरफ जहा इंसान छोटी छोटी चुनौतियों से हार मान जाता है ,जैसे पारिवारिक कलह या आर्थिक तंगी या फिर टूटे हुए सपने और वही दूसरी तरफ अरुणिमा सिन्हा जैसे लोग ज़िन्दगी कि हर चुनौती का सामना डट कर कर लेते है और अपना परचम फहराते हैं।
तो क्या करे कि हमारा मानसिक स्वास्थय सुधरे ,डॉक्टर्स आपकी सहायता तब करते हैं जब आप समस्या से घिर चुके होते हो ,क्यों न कहीं कुछ ऐसा उपाय हो कि हमें समस्या का सामना ही न करना पड़े और अगर सामना हो भी तो हम उसे खुद ही हरा कर जीत जाए।

इसके लिए हमें स्वयं में कुछ सुधार लाने होंगे ,शरीर की सफाई के साथ साथ मन की सफाई पर भी ध्यान दें-

१- झूठ जितना कम हो सके उतना कम बोलिये क्योंकि आज की दुनिया में हमेशा सच बोलना संभव नहीं है पर फिर भी सच बोलने की कोशिश करें,इससे दो फायदे होंगे एक तो आपको बातें याद नहीं रखनी पड़ेंगी और दूसरा लोगों का विश्वास आपके प्रति बढ़ेगा और रिश्ते सुधरेंगे,क्योंकि झूठ कभी अकेला नहीं आता वो अपने साथ हज़ारों झूठ लाता है पर फिर भी हार जाता है और सच अकेला रहता है पर फिर भी जीतता है और सच बोलने से आप मन में शांति का अनुभव करते है वो आपको कहीं और नहीं मिलेगा।

२- हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश करें और ये बात हमेशा ध्यान रखें कि हम इंसान है और इसलिए हम हमेशा सकारात्मक नहीं रह सकते हैं और इसके लिए आपको खुद ही पहल करनी होगी, जब भी आप सही महसूस न करें उस समय आपको ज़रूरत है अच्छी किताबों की,उन्हें उठाइये और पढ़ डालिये आपको बहुत अच्छा महसूस होगा,क्योंकि ये कहावत आपने सुनी ही होगी कि एक अच्छी किताब आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती है और मेरे जीवन में मेरी मार्गदर्शक किताब है –सत्य के अनुप्रयोग -महात्मा गाँधी, जिससे मेरे जीवन में बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
नकारात्मक लोगों से उचित दूरी बनाये रखें क्योंकि वो अपनी कुंठा दूसरों को भी देना चाहते हैं,इसलिए उनकी भावनाओं को समझते हुए उनसे उचित दूरी बनाये रखें।

३- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुश रहना सीखें ,खुद से प्यार करें और अपनी खुशियों को बांटना सीखे और दूसरों की खुशियों में खुश रहना सीखे ,क्योंकि जिन लोगों को मैंने मानसिक हालात से जूझते हुए देखा है उन सबमें एक ही बात समान थी ईर्ष्या की भावना, दूसरों की ख़ुशी से ईर्ष्या करना, क्योंकि अगर आप दूसरों की ख़ुशी से दुखी होते हैं तो सच मानिये आप कभी सुखी नहीं रह सकते क्योंकि दूसरों की ख़ुशी आपके हाथ में नहीं हैं और जब जब वो खुश होंगे तब तब आप दुखी होंगे तो अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें ,आपके पास जो भी है उसे संजो कर रखिये वर्ना दूसरों से ईर्ष्या करते करते आप वो भी खो देंगे जो आपके पास शायद सबसे बेहतर हो और उसी में ही अपनी खुशियाँ ढूंढिए ।
एक बार शुरुवात कीजिये दूसरों की ख़ुशी में खुश रहने की, दूसरों के लिए अच्छा सोचने की,अच्छा करने की,खुशियाँ खुद ही आपका दरवाज़ा खटखटाएंगी ।

४- अपेक्षा दुःख का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए अपेक्षा सिर्फ खुद से रखिये औरों से नहीं और कोशिश कीजिये अपनी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की, और यही छोटी छोटी कोशिशे आपको खुशियों से भर देंगी ।

५- अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कोशिश करें खुद की मेहनत से आगे बढ़ने की ,क्योंकि शॉर्टकट से आपको सफलता तो मिल जाती है पर आप उसके लायक कभी नहीं बन पाते और आप हमेशा हीन भावना से ग्रसित रहते है जो आपके व्यक्तित्व में दिख ही जाती है क्योंकि अगर आप मेहनत कर के सफलता पाते हैं तो उस सफलता के लिए की गयी जी तोड़ मेहनत ही आपके व्यक्तित्व में निखार लाती है और सफलता के रास्ते में आपको कई बार असफलता का सामना करना पड़ता है, तब आप सीखते हैं ज़िन्दगी की मुश्किलों को हल करने का तरीका और आप फिर से गिर कर उठते हैं खुद से संभलते हैं और जुट जाते हैं फिर से नयी कोशिश करने में ,जब आप मेहनत करते हैं तो उस मेहनत का निखार आपके व्यक्तिव में दिखाई देता है और आप आत्मविश्वास से भरे हुए नज़र आते हैं चाहे आप असफल ही क्यों न हो पर उस असफलता में भी आनंद आता है कि हमने पिछली बार से बेहतर किया है और आप फिर से ख़ुशी से जुट जाते है जो एक दिन ज़रूर आपको आपकी सफलता तक पहुंचाएगा और वो सफलता सिर्फ आपके कार्यक्षेत्र में ही नहीं आपके जीवन में भी मिलती है और दिखाई भी देती है और इसीलिए –
जो अपने दम पर जिए ,सच में ज़िन्दगी है वही।(ये एक विज्ञापन का स्लोगन था और मेरे मन पर इसने बहुत गहरी छाप छोड़ी)

६- हमेशा अपने शब्द और धन सही जगह पर खर्च करें,क्योंकि दोनों का ही प्रयोग अगर आप गलत जगह अपर और ज़रूरत से ज़्यादा करेंगे तो आपको ही नुकसान उठाना होगा।
कोशिश करें कम बोलने की जिससे कि आपको समय मिल सके ये सोचने का कि आपके शब्दों का क्या प्रभाव पड़ सकता है और धन को हमेशा अपनी आय के अनुसार ही खर्च करें,दूसरों कि देखदेखी बिलकुल न करें और अपनी आय का कुछ हिस्सा अच्छे कार्यों में ज़रूर लगाएं,आपको आत्मिक संतोष मिलेगा ।

७- आपके आस पास,घर में, कार्यक्षेत्र में आपको तरह तरह के लोग मिलेंगे,आप स्वयं को किसी भी प्रकार से प्रभावित न होने दें और जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार करें और उनसे सीखने कि कोशिश करें,अच्छे को आत्मसात कीजिये और उनकी गलतियों से सबक ले कि आपको क्या नहीं करना है, क्योंकि चाणक्य ने कहा है कि अपनी गलतियों से सीखने के लिए आपकी उम्र बहुत कम पड़ जाएगी इसलिए दूसरों कि गलतियों से ही सीख लें ।

८- सबसे अपने सम्बन्ध अच्छे रखें क्योंकि कभी भी आपको किसी की ज़रूरत पड़ सकती है, सबसे विनम्र रहें चाहे वो आपका हेल्पर ही क्यों न हो पर हाँ धूर्त लोगों से उचित दूरी बनाये रखें ।

अच्छे बनिए पर बेवकूफ न बनिए और हाँ एक बार चाणक्य नीति ज़रूर पढ़े क्योंकि चाणक्य ने इस किताब में बहुत सारी अच्छी बातें लिखी हैं ।
अब मैं एक ही बात कहना चाहूंगी कि हमारे कुछ धर्म ग्रंथों में ही आपको जीवन जीने का उचित पथ प्रदर्शन मिल जायेगा और बहुत सारी सीख भी, जैसे श्रीमद भगवद गीता, इसको पढ़कर आप जीवन कि हर कठिनाई का सामना समझदारी से कर सकते हैं ये जीवन का सार है और धर्म से मेरा मतलब सिर्फ हिन्दू धर्म से ही नहीं है, सभी धर्मों में अच्छी बातें ही सिखाई जाती हैं उन सभी से जुड़कर हम जीवन जीने की अच्छी सीख ले सकते हैं।
जो भी मैंने इस लेख में लिखा है, इनमें कुछ मेरे अपने अनुभव हैं जो मुझे अपने आस पास के लोगों को पढ़ने से मिले है और कुछ उन किताबों का सार है जो मैंने पढ़ी हैं और यहाँ पर मैं ये भी कहना चाहूंगी की जो मैंने लिखा है उस पर चलते चलते कभी कभी मैं खुद भी भटक जाती हूँ पर मैं फिर से कोशिश करती हूँ और कुछ किताबों के साथ मैं फिर से चल पड़ती हूँ अपनी ज़िन्दगी को खुशियों से भरने और खुद को ढूंढने ।
धन्यवाद ॥

 

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