नवरात्रि का संकल्प सिर्फ नौ दिन ही क्यों ??

नोट: मेरे इस लेख को धर्म से जोड़ कर न देखें,मैं अपने धर्म का बहुत सम्मान करती हूँ और ये लेख सिर्फ इंसानों के लिए है इसलिए इसके बीच में धर्म को लाने की आवश्यकता नहीं है ।
आप सभी को नवरात्रि की बधाई हो ,मेरा सवाल बस इतना ही है कि नवरात्रि का संकल्प सिर्फ नौ दिन ही क्यों?
कन्याओं की पूजा सिर्फ नौ दिन ही क्यों ?
बाकि पूरा साल क्या वो खिलौना बन जाती है? जिसे आप खेलो मन भर जाये तो जला दो या फ़ेंक दो।
और सभी धर्म के ठेकेदारों से मेरा बस इतना पूछना है कि जब भी वो किसी बच्ची या किसी लड़की को अकेला देखते हैं तो उनको सुरक्षित स्थान तक,उनके माता पिता तक क्यों नहीं पहुँचाते?
क्या लड़कियों कि सुरक्षा मायने नहीं रखती?
जो माहौल हमारे देश में चल रहा है ऐसे में बधाई का पत्र देश का हर नागरिक है चाहे वो किसी भी धर्म ,किसी भी जाति,किसी भी राज्य का हो या चाहे वो महिला हो या पुरुष हो ।

सबसे पहला बधाई का पात्र हर वो पति है जो पूरे साल भले ही अपनी पत्नी का सम्मान न करता हो पर नवरात्रि में माता को पूजना नहीं भूलता,जो नवरात्रि में नौ कंजक तो ढूंढता है पूजन के लिए पर अगर उसके अपने घर लड़की पैदा हो तो या तो उसे कोख में ही मार देता है या पत्नी कि ही ज़िन्दगी छीन लेता है।
बधाई के हक़दार वो ससुराल वाले भी हैं जो घर में आयी बहु के नयी ज़िन्दगी के सपनों को तोड़ने में कोई कसर नहीं रखते और सबसे ज़्यादा बधाई की हक़दार होती हैं घर की महिलाएं जो नयी बहु को सामने देखते ही भूल जाती है कि वो भी इंसान होती है,और उसका मानसिक और शारीरिक रूप से शोषण करने में कोई कमी नहीं छोड़ती और ये शोषण तब भी नहीं रुकता जब वो गर्भ से होती हैं,कुछ खुशकिस्मत होती हैं जो अपने बच्चों को इन कठिन परिस्थितियों में भी जन्म दे देती हैं और कुछ हार जाती है सबकुछ,तो बधाई हो एक माँ के अजन्मे बच्चे के हत्यारों को जो आज एक माँ के सामने नवरात्रि के व्रत का संकल्प लेंगी ।
बधाई हो नवरात्रि की उन दहेज़ के लोभियों को भी जिन्होंने दहेज़ के लालच में जाने कितनी ही लड़कियों को कभी जला दिया,तो कभी मार दिया,पुरुषों को छोड़ दिया जाए तो उन औरतों को भी बहुत बहुत बधाई जिन्हें औरत होकर भी औरतों का दर्द दिखाई नहीं देता।
बधाई के हक़दार वो पुरुष भी हैं जिन्हें सिर्फ अपनी बहने,बेटियां और माँ सम्मान योग्य दिखती है,और उन्हीं की रक्षा का संकल्प लिया है और साल में दो बार माता के व्रत का संकल्प लेते हैं और बाकि सारी महिलाओं से उनका इंसानियत दिखाने का नाता भी नहीं है ।
बधाई की हक़दार सही मायने में वो बुरी औरते हैं जो समाज के पैमानों पर खरी नहीं उतरती, जो ज़िन्दगी अपने हिसाब से जीना जानती हैं, ईंट का जवाब पत्थर से देना जानती हैं और जिन्हें पता हैं ज़िन्दगी एक ही बार मिली हैं तो क्या हुआ जो हम देवी न बन पाए पर चंडी ज़रूर बनिए क्योंकि आज के समय में देवी की पूजा सिर्फ नौ दिन होती है,बाकि दिन वो सिर्फ एक औरत होती है जिससे हर कोई अपना स्वार्थ साधना चाहता है इसलिए स्वार्थी बनिए खुश रहिये ।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।
इसलिए क्यों न हम ऐसे समाज का निर्माण करें जहा नारी पूजनीय हो ,क्यों न हम अपने धर्म की शिक्षा का पालन करें,क्यों न फिर से हर नारी की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हम सभी लें ,क्यों न हर दिन नवरात्रि सा हो जाये, क्यों न हम फिर से इंसान बन जाये हर दिन के लिए ।
हर दिन नवरात्रि की कामना के साथ आप सभी को नवरात्रि की बधाई ॥
जय माता दी ॐ ॥

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