ऑनलाइन क्लासेज से ऑनलाइन एक्ज़ाम्स तक

आजकल सभी स्कूलों में ऑनलाइन एक्ज़ाम्स चल रहे हैं जैसा कि आप सब जानते ही होंगे और हो सकता है आपके बच्चों ने भी ऑनलाइन एक्ज़ाम्स दिए हो, मेरी बेटी ने भी ऑनलाइन परीक्षा दी है इसीलिए मन में बहुत से विचार घूमने लगे बस वही विचार आपके सामने रखना चाहती हूँ।
कोरोना के संकट काल में हमें बहुत सारी नयी चीज़ें सीखने को मिली जो शायद साधारणतया हम कभी न सीख पाते या फिर हमने कभी सोचा ही नहीं कि ऐसे भी दुनियाँ चल सकती है ।
सीखने को हमने बहुत कुछ सीखा और बहुत कुछ नया भी किया, कुछ दुखद अनुभव भी हुए और कुछ अच्छे अनुभव भी मिले और इस कड़ी में मेरे लिए जो सबसे रोमांचक अनुभव रहा वो ये कि दुनिया इंटरनेट के सहारे भी चल सकती है,जैसे ऑनलाइन शॉपिंग ये हम पहले भी करते थे पर अब इसमें बढ़ोत्तरी आ गयी और राशन भी ऑनलाइन आने लगा, पढ़ाई ऑनलाइन, ये ऑनलाइन पढ़ाई पहले भी होती थी पर सिर्फ प्रतियोगात्मक परीक्षाओं के स्तर पर, पर इस दौर में नर्सरी से लेकर प्रोफेशनल कोर्स तक की क्लासेज ऑनलाइन शुरू हो गयी ।
ऑनलाइन क्लासेज का विचार बहुत ही सराहनीय है, ऑनलाइन क्लासेस से बच्चों की रुकी हुई पढाई फिर से चलने लगी और प्राइवेट स्कूल के टीचर्स को भी उनका मेहनताना मिलने लगा और बच्चे विशेषकर छोटे बच्चे या कहें कि नर्सरी से प्राइमरी तक के बच्चों के अपनी पढ़ाई और होमवर्क के संपर्क में लगातार बने रहने से उनकी पढाई में जो नुकसान हुआ उससे उन्हें बचाया जा सका।
पर ऑनलाइन क्लासेज का हास्यापद दुःख छोटे बच्चों के माता-पिता से बेहतर और कोई नहीं जान सकता अगर आपके घर में भी छोटे बच्चे हैं तो आप मेरी भावनाएं ज़रूर समझेंगे, पर जो भी हो ऑनलाइन क्लासेज चलने से बच्चों में एक अनुशासन बना रहा उनकी पढ़ाई के प्रति, होमवर्क के लिए वो ज़िम्मेदार हो गए, इसके लिए मैं सभी शिक्षकों की आभारी हूँ कि उन्होंने हमारे बच्चों को इस कोरोना के संकट काल में सही दिशा दिखाई ।

 

ऑनलाइन क्लासेज तक सब सही था पर ऑनलाइन एक्ज़ाम्स, इसका विचार मुझे कुछ समझ नहीं आया कि आखिर ऑनलाइन एक्ज़ाम्स करवाने का उद्देश्य क्या है?
ऑनलाइन एक्ज़ाम्स कि विश्वसनीयता कितनी है, अगर बच्चों को आप एक घंटे में एक्ज़ाम करने को देते हो तो क्या आपको पता है कि उसने ये ईमानदारी से किया या बिलकुल भी नक़ल नहीं की और एक बच्चा अपने घर में बैठकर क्या एक्ज़ाम देगा?
हो सकता है कि एक्ज़ाम करने का एक मक़सद ये हो कि बच्चे अपनी परीक्षाओं के प्रति ज़िम्मेदारी लें और मनोविज्ञानिक तौर पर एक्ज़ाम देने के लिए तैयार रहे पर आप ही बताएं क्या आप ऐसा करने में सफल रहे ?और इसका सही जवाब केवल बच्चों के माता पिता या अभिभावक ही दे सकते हैं कि उनके बच्चों ने कैसे ये एक्ज़ाम दिए हैं और कितनी तैयारी की ।
जहाँ तक बात आती है कि ऑनलाइन वीडियो कालिंग में सामने बिठा के आपने एक्ज़ाम दिलाये हैं तब भी इस बात कि गारंटी कहा तक है कि पूरी ईमानदारी बरती गयी है ।

यहाँ पर ऑनलाइन एक्ज़ाम्स दिलाने का सिर्फ एक ही उद्देश्य है कि बच्चों को अगली क्लास में प्रमोट करना या फिर उनका साल न बर्बाद होने देना और ये सही भी है पर क्या इसके लिए ऑनलाइन एक्ज़ाम ज़रूरी है जिसकी कोई विश्वसनीयता ही नहीं है?
एक्ज़ाम दिलाना क्या बच्चे के मानसिक विकास से ज़्यादा ज़रूरी है, क्या फायदा उस बच्चे को अगली क्लास में बढ़ाने का जो अपनी इस क्लास की पढ़ाई ही ढंग से पूरी न कर पाया हो और मैं आपको यहाँ पर ये ज़रूर बताना चाहूंगी कि मैंने ऐसे बहुत से बच्चे देखे हैं इसीलिए मैं ये बात लिख पा रही हूँ।
किंडर गार्डन के बच्चे ऑनलाइन एक्ज़ाम दे रहे हैं और माता-पिता भी उसमे शामिल है और इन्हीं माता-पिता में एक नाम मेरा भी है, मैंने भी अपनी बेटी को ऑनलाइन एक्ज़ाम दिलवाया और कैसे दिलवाया ये मैं ही जानती हूँ, बस उसी समय मुझे लगा कि ऑनलाइन एक्ज़ाम का कोई भी औचित्य नहीं है ।
क्या हम कोरोना काल में सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देकर उसे और बेहतर नहीं बना सकते फिर एक्ज़ाम क्यों ?
पहले मुझे लगता था एक्ज़ाम सब जगह होते हैं फिर मेरे कुछ दोस्त जो विदेश में रह रहे हैं या रह कर आये हैं, उनसे पूछने पर पता लगा कि वहाँ छोटी क्लास में बच्चों के एग्जाम नहीं होते क्योंकि एक्ज़ाम में समय बर्बाद करने कि बजाय वहाँ ध्यान दिया जाता होगा बच्चे के सर्वांगीण विकास पर, क्योंकि आगे चलकर तो हर कदम पर ही एक्ज़ाम ही हैं।

इससे जुड़ा एक बहुत ही मज़ेदार किस्सा मुझे याद है कि जब हमारे पड़ोसी की बेटी का नर्सरी का एक्ज़ाम हुआ तब उसने बहुत ही हास्यापद स्थिति पैदा कर दी, उसका जो मन आया उसने लिखा और एक एक्ज़ाम में जब मन नहीं हुआ तब उसने पेंसिल ही नहीं उठायी और अध्यापिका के बहुत मनाने के बाद उसने लिखना शुरू किया और बिलकुल यही हाल मेरे घर का है, तो ऐसे में मैं ये पूछना चाहती हूँ आप सबसे कि जिस बच्चे को एक्ज़ाम का मतलब ही नहीं पता आप उससे क्यों एक्ज़ाम दिलवा रहे हैं और जो बच्चे स्कूल में एक्ज़ाम ढंग से नहीं दे पाते वो ऑनलाइन एक्ज़ाम कैसे देते होंगे ये आप समझ सकते हैं।
मैं बस इतना ही कहना चाहूंगी कि कोरोना काल में ज़रूरत है सिर्फ बच्चों कि पढ़ाई पर ध्यान देने की, उनके बौद्धिक विकास की , ऑनलाइन एक्ज़ाम्स की नहीं और छोटे बच्चों के लिए तो मैं कहना चाहूंगी कि कोरोना काल के बाद भी दूसरी कक्षा तक उनके
एक्ज़ाम न करवाएं जायें।
ये मेरे अपने विचार थे ऑनलाइन एक्ज़ाम के बारे में,आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में ज़रूर साझा करे और अगर आप मेरे विचार से सहमत हैं तो शेयर ज़रूर करें।
धन्यवाद् ॥

4 thoughts on “ऑनलाइन क्लासेज से ऑनलाइन एक्ज़ाम्स तक

  1. Nice thoughts, but as a teacher and as a mother I think writing exams may be formality for some children, but some are writing very seriously, I will share one incident, my son completed his exam and time was over, he was not able to check his answers, while making pdf I told him to check, he said NO, I won’t, I will not do any kind of cheating, I shared this because it is not only till 2nd class I felt all children are cheating if they want, if will tell our children to do honestly they will do.

    1. exactly mam 🙂 but all kids are way too different from each other, while some are honest about their exams but there are also students like copying the whole paper.

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