तनिष्क का विज्ञापन विवादास्पद क्यों ?

बहुत दिनों से सोशल मीडिया पर तनिष्क के विज्ञापन की बहुत चर्चा थी कि ये विज्ञापन बहुत गलत है और तनिष्क ने अब ये विज्ञापन बंद कर दिया है तो मैंने सोचा मैं भी देख लूँ आखिर ऐसा भी क्या बना दिया तनिष्क ने और जब मैंने यूट्यूब पर विज्ञापन ढूँढा तो आखिरकार मिल ही गया।
जब ये विज्ञापन देखा तो मुझे ऐसा कुछ गलत मिला नहीं पर आजकल हमारे देश में कुछ बातें करना बहुत गलत हो गया है तो आज के भारत के हिसाब से ये विज्ञापन तो बहुत गलत है, क्योंकि ये आज का भारत है जहाँ भले ही दो धर्मों के लोग ऑफलाइन आपस में प्यार से रहते हो पर ऑनलाइन देशभक्ति दिखने के लिए सांप्रदायिक नफरत फैला रहे हैं।

 

भले ही आप अपने मोहल्ले में एक दूसरे के साथ प्यार से रहे, दोस्तों के साथ प्यार से रहे पर सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक नफरत फैलाना ज़रूरी है ।
तनिष्क जैसे विज्ञापन पहले भी आते थे पर तब कोई मुद्दा नहीं उठता था लेकिन आज मेरे देश को साम्प्रदायिकता रूपी नाग ने निगल लिया है जिसे हर बात में धार्मिक कोण ढूंढ कर उसे मुद्दा बना देना है और यहाँ पर कुछ महान अदाकाराएं भी पीछे नहीं है ,जिन्हें लगता है कि उस विज्ञापन में दिखाई गयी लड़की ससुराल वालों के द्वारा उसके लिए कुछ करने पर कृतज्ञता दिखा रही है, पर यहाँ पर बात दो धर्मों की थी तो इनको ये भी दिखाई दिया लेकिन बाकि समय इन्हें फ़िल्मी दुनियाँ के इतर कुछ नहीं दिखाई देता,मैं जानना चाहूंगी की क्या इन्होने कभी हमारे देश में ससुराल में बहुओं की हालत देखी है चाहे वो किसी भी धर्म में हो, जहाँ ससुराल में पहला कदम रखने के साथ ही समझा दिया जाता है कि ये तेरा घर नहीं है, यहाँ हमारे हिसाब से रहना होगा और सच मानिये ज़िन्दगी भले ही ख़तम हो जाये पर न कभी ससुराल वाले अपने होते हैं और न ही ससुराल और जो इस विज्ञापन में ससुराल वालों का बहु के साथ रिश्ता दिखाया गया हैं वो शायद ही किसी घर में होता हो और यहाँ पर किसी धर्म विशेष कि बात नहीं हो रही हैं यहाँ मैं पूरे देश की बात कर रही हूँ और ऐसी फ़िल्मी हस्तियों से मैं बस इतने कहना चाहूंगी की देश में नफरत फ़ैलाने की बजाय अगर आप ध्यान नारी सशक्तीकरण पर लगाए तो कितना अच्छा हो पर शायद इन लोगो के सारे मुद्दे फ़िल्मी दुनियां तक ही सीमित होते हैं जहाँ पर ये दूसरों की चिता की आग पर अपनी रोटियां सेंकना जानती हैं, बाकि देश के किसी मुद्दे से इनका लेना देना नहीं हैं, तो ऐसे लोगो से मेरा यही कहना हैं की सोशल मीडिया पर नफरत न फैलाये उसका सही उपयोग कीजिये ।

 

सोशल मीडिया का सही उपयोग किया गया जब एक भले मानस ने बाबा का ढाबा को पहचान दिलाई, जब लोग ऐसे ही जाने कितने लोगों को उनकी सही पहचान दिलाते हैं, जब रानू मंडल को स्टेशन से उठा कर बॉलीवुड में पहचान दिलाई गयी,और वो पहचान दिलाने वाले हम लोग ही तो है।
ये हैं हमारा देश जिसे परवाह है लोगो की, जो जानता है कि सोशल मीडिया का सही उपयोग कैसे किया जाता है, जो कभी किसी को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ उठाता है, वो नहीं जो देश में साम्प्रदायिकता के नाम पर नफरत फैला रहा है।
सबसे सराहनीय कदम उठाया है पारले-जी ने जिन्होंने देश में नफरत फ़ैलाने वाले टी०वी० चैनलों को अपना विज्ञापन नहीं देने का फैसला लिया है ।
आज हमारे देश का हाल यह है कि विज्ञापन आये या फिल्म विरोध पहले ही हो जाता है, लक्ष्मी बम अभी आयी नहीं है पर नाम पर विरोध शुरू हो गया और बहुत हद तक यह विरोध सही भी है कि हमारी देवी का नाम ऐसे क्यों उपयोग में लाया गया पर मैं आप लोगो से ये बात पूछना चाहती हूँ कि इस फिल्म से पहले भी सॉउथ की एक फिल्म इसी नाम से आ चुकी है,तब आपके दिमाग में नहीं आया की ये नाम गलत है और आप उस भी आपको आवाज़ उठानी चाहिए थी।
ये तो रही फिल्म की बात अभी आप जायेंगे पटाखे खरीदने तो उन पटाखों के डिब्बों पर आज से नहीं बहुत पहले से ही देवी देवताओं के चित्र बने रहते हैं और कई पर लक्ष्मी बम भी लिखा रहता है जिसे आप पटाखे जलाने के बाद फेंक देते हो तब आप को इसका विरोध करने करने का विचार नहीं आया?

जब देश का झंडा ज़मीन पर गिरा मिलता है क्या तब आप उसे उठाते हो?
शादी के कार्ड पर जो गणेश जी छपवाते हो, बांटते हो उसके बाद कभी सोचा है उसका क्या होता है ?
धर्म हमें ज़िन्दगी में भटकने से बचाता है, सही रास्ता दिखाता है, अपने धर्म को मानना और उसका सम्मान करना बहुत अच्छी बात है, पर साथ में हमें मानवता का धर्म भी निभाना चाहिए जो सबसे ऊपर है और सभी धर्म मानवता का ही पाठ पढ़ाते हैं बाकि स्वयं मानव ने ही अपने अपने धर्मों को अपने हिसाब से बदल दिया है।
धर्म के नाम पर नफरत फैलाना गलत है, और हर बात में धर्म को बीच में लाना बिलकुल भी सही नहीं है, सोशल मीडिया का उपयोग सही उद्देश्य से कीजिये, प्यार बांटिए नफरत नहीं।
ये मेरे अपने विचार थे अगर किसी की भी भावनाओं को मैंने आहत किया हो तो क्षमा चाहूंगी ।
धन्यवाद् ॥

2 thoughts on “तनिष्क का विज्ञापन विवादास्पद क्यों ?

  1. आपका लेख काफी अच्छा लगा लेकिन प्रश्न वही है कि सभी ज्ञान सिर्फ एक ही पक्ष को क्यों? कुछ देशों में शिक्षक का गला तक काट दिया जाता है, मात्र एक चित्र बनाने पर. यहाँ तो फिर भी आधे लोगो को पता ही नही है कि South में भी लक्ष्मी बम बन चुकी है।

    1. aapne bhi bilkul sahi baat uthayi hai ,dharm ke nam par jo bhi lade wo galat hai aur kattarwadi kahi bhi kisi bhi dharm me sahi nahi hai par hum media ke dwara nafrat kam karne ki koshish kar sakte hai nahi to ye sab hota hi rahe

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