उत्तराखंड स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

आइये जानते हैं आज का दिन 9 नवंबर क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है, और आज के दिन क्या खास हुआ था ।
9 नवंबर 2000, आज के ही दिन उत्तर प्रदेश से अलग निकल कर एक नया राज्य अस्तित्व में आया जो है अपना प्यारा उत्तराखंड, जो देश का 27 वां राज्य और 11 वां हिमालयी राज्य बना।
इसके पहले मुख्यमंत्री श्री नित्यानंद स्वामी व राज्यपाल श्री सुरजीत सिंह बरनाला थे ।

उत्तराखंड के बारे में सारी बातें आपने किताबों में पढ़ी होंगी, तो चलिए देखते हैं उत्तराखंड सीधे एक पहाड़ी के दिल से ।

यह अपराधों की श्रेणी में सबसे सुरक्षित राज्यों में आता है, यहाँ आपको जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क मिल जायेगा जहा बाघों की संख्या देश भर में सबसे ज़्यादा है, यहाँ खूबसूरत फूलों की घाटी है जहाँ फूलों की हज़ारों प्रजातियां आपको मिल जाएगी, यहाँ नैनीताल की खूबसूरत झील है, भगवन शिव का धाम केदारनाथ है, यहाँ से गंगा जी और यमुना जी निकलती हैं अपने प्राकृतिक स्वरुप में और सबसे बड़ी बात यहाँ शांति है, सुकून है, यहाँ इंसानियत आज भी ज़िंदा है, और इस बात का एहसास तब होता है, जब आप उत्तराखंड से बाहर किसी दूसरे राज्य में जाते हो और लौटते समय उत्तराखंड परिवहन की बसों को देखने पर एक अलग ही ख़ुशी मिलती है और बस के अंदर लगता है हम उत्तराखंड ही पहुंच गए हैं, क्योंकि दुनियां के किसी भी कोने में आपको उत्तराखंड जैसा दूसरा राज्य नहीं मिलेगा।
हो सकता हैं कि कुछ कमियां हो पर अच्छाइयां भी हिमालय जैसी विशाल हैं तो छोटी छोटी बातें ज़्यादा मायने नहीं रखती।
जहाँ दिल्ली में साफ़ हवा मिलना मुश्किल हैं वहीँ हमारे राज्य में आप जी भर के सांस ले सकते हैं ।
महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित राज्य अपना उत्तराखंड ही है और अपराध दर यहाँ सबसे कम है ।
यहाँ दिल खोल के अपनाते लोग है, गढ़वाल है कुमाऊं भी है, और यहाँ है अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक युवा ।
यहाँ के खाने का स्वाद निराला हैं, सादगी से भरा और बेहद पौष्टिक, यहाँ भट्ट के डुबके और चुड़कानी है ,यहाँ चैंसू का स्वाद हैं, झोली भात हैं, घुघुते का त्यौहार हैं, कढ़ाही में धीमी आंच में पकता प्यार से भरा माँ के हाथों का स्वाद है,यहाँ आमा बुबु का दुलार भी है।
यहाँ सुहागनों का श्रृंगार भी कुछ अलग है, शुभ काम के लिए पिछोड़ा है, गले में गुलूबंद है, नाक की नथुली भी चन्द्रमा जैसी छटा वाली है, और हाथों के पौंजी, ज़िम्मेदारी से भरे हुए हाथों की कोमलता का एहसास है ।

यहाँ बुग्याल है, पानी का धारा है, यहाँ झील और नदियों के साथ नौला और शीर का ठंडा पानी है, यहाँ हयूं है, चौमास है,यहाँ की भाषा कुमाउँनी और गढ़वाली है पर हर जगह कुछ बदल सी जाती है बस नहीं बदलता है अपना ठैरा और बल, जो हर पहाड़ी की पहचान है और पहाड़ी भाषा की मिठास है ।
हमको असज भी होती है, हम गिरते नहीं, घुरि जाते हैं, फिसलते नहीं रड़ जाते हैं, कुछ समझ न आये तो गजबजी जाते हैं नहीं तो कभी कभी लटपटा जाते हैं, हम पतले नहीं होते, छिर जाते हैं ।
जाड़ों में सगड़ जलाते हैं, खाना गांव में भिनेर में बनाते हैं, यहाँ मोहल्ला नहीं होता बाखइ होती हैं, रिश्तेदारी नहीं बिरादरी होती हैं ,
हम सीधे सादे नहीं होते हम लाटे होते हैं, हमारे यहाँ लड़कियां इतराती नहीं हैं यहाँ छलछलाट और बलबलाट होने वाला ठैरा और भी बहुत सी बातें हैं आपको याद आये तो कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं ।
यहाँ सिर्फ पहाड़ी बसते है और जो कहीं भी जाये पर दिल से पहाड़ी ही रहते हैं और कहीं से भी यहाँ आएं यहीं के होकर रह जाते हैं और पहाड़ी ही बन जाते हैं और सभी पहाड़ियों को उत्तराखंड स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।।

चित्र साभार – सागर टम्टा

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